राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय योजक वर्ग के पहले दिन संघ के विस्तार और शाखाएं बढ़ाने पर मंथन किया गया। जम्मू कश्मीर और दक्षिण के राज्यों में संगठन के विस्तार पर विशेष फोकस रहा। संघ प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह भैया जी जोशी और सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी और दत्तात्रेय ने अलग- अलग सत्रों को संबोधित किया। पहले दिन तीन सत्र और एक बौद्धिक वर्ग हुआ।
योजक वर्ग की शुरुआत सोमवार को अंबावाय स्थित एसआर इंजीनियरिंग कॉलेज में 6.30 बजे योग से हुई। सुबह नौ बजे पहले, 10.45 बजे दूसरे और तीसरा सत्र तीन बजे से प्रारंभ हुआ। इन सत्रों में संघ प्रमुख डॉ. मोहन राव मधुकरराव भागवत, सरकार्यवाह भैया जी जोशी, सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी, दत्तात्रेय समेत अन्य पदाधिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों से आए योजकों को संबोधित किया। संघ के विस्तार के लिए शाखाएं बढ़ाने के साथ-साथ पिछले साल कौन सी योजनाएं बनाईं गईं थीं, उन पर कितना काम हुआ, इस पर चर्चा की गई। साथ ही, आगामी योजनाओं पर विचार विमर्श किया गया।
जम्मू कश्मीर और दक्षिण राज्यों में संघ के विस्तार पर मंथन हुआ। शाखाएं बढ़ाने के लिए अलग-अलग विचार लिए गए। शाम को 5.15 बजे आयोजित बौद्धिक वर्ग में व्यक्तित्व विकास पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने प्रचारकों की कार्य पद्धति को और बेहतर बनाने पर विचार रखे। अखिल भारतीय योजक वर्ग में देश भर से 240 योजक (शिक्षार्थी) शामिल होने आए हैं। इसके अलावा वर्ग में संघ के राष्ट्रीय, प्रांतीय और क्षेत्रीय पदाधिकारी मौजूद हैं।
साल भर के कार्यक्रमों की बनती है रूपरेखा
राष्ट्रीय स्वयं संघ की साल में तीन महत्वपूर्ण बैठकें देश के अलग- अलग स्थानों में होती हैं। इसमें एक प्रतिनिधि सभा में आरएसएस के साथ सभी संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। इस सभा में आरएसएस से जुड़े हर संगठन के प्रतिनिधि भी अपनी सालाना रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।
इस बैठक में राजनीतिक चर्चा भी होती है। एक चिंतन बैठक होती है, जिसमें संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी मौजूद रहते हैं। एक योजक वर्ग होता है, जिसमें राष्ट्रीय, प्रांतीय व क्षेत्रीय टोलियों के साथ साल भर के कार्यक्रमों की रूपरेखा तय होती हैं। संघ प्रमुख, सरकार्यवाह, सह सरकार्यवाह के दौरे तय होते हैं। संघ के विस्तार और शाखाएं बढ़ाने पर चर्चा होती है। मालूम हो कि देश में 55 हजार से अधिक शाखाएं संचालित होती हैं।