झांसी। रेलवे स्टेशन पर शनिवार की सुबह बांदा पैसेंजर से उतारे गए जहरखुरानी के शिकार दंपति को मेडिकल कॉलेज ले जाने को लेकर आरपीएफ व जीआरपी के मध्य विवाद होता रहा। इससे पीड़ित दंपति एक घंटे तक उपचार के लिए तड़पता रहा। बाद में जीआरपी दोनों को एंबुलेंस से लेकर मेडिकल कालेज गई।
शुक्रवार की रात विलंब से चल रही बांदा झांसी पैसेंजर में सवार दंपति जहरखुरानी का शिकार हो गया। शनिवार की सुबह ट्रेन के झांसी पहुंचने पर पीड़ित दंपति को उपचार के लिए उतारा गया। रेल चिकित्सक डॉ. व्योमा ने परीक्षण उपरांत उन्हें मेडिकल कालेज रेफर कर दिया।
सूचना पर 108 नंबर एंबुलेंस भी आ गई। मगर, दोनों को मेडिकल कालेज ले जाने को लेकर आरपीएफ व जीआरपी के जवानों में विवाद होता रहा। इससे पीड़ित यात्री एक घंटे तक उपचार के लिए तड़पते रहे। बाद में जीआरपी जवान शिवचरण उन्हें एंबुलेंस से मेडिकल कालेज ले गया।
इधर, मेडिकल कॉलेज में दंपति ने अपना नाम छिंदवाड़ा के वार्ड नंबर 16 न्यू पेंच गली निवासी ननजू (55) पुत्र तईया व पछिया बाई (50) बताया। दंपति ने बताया कि वह हरपालपुर से लौट रहे थे। हालांकि, वह यह बताने की स्थिति में नहीं थे कि घटना कैसे हुई व उनका क्या सामान चोरी हुआ।
वर्षों से चल रहा जीआरपी-आरपीएफ के बीच विवाद
झांसी। रेलवे में आरपीएफ व जीआरपी के बीच यात्रियों के साथ होने वाले अपराध को लेकर विवाद होता रहता है। आरपीएफ के पास सीमित अधिकार होने के कारण वह कम मौके पर ही संवेदनशीलता दिखाते हैं। अधिकांश मामलों में वह पल्ला झाड़ लेते हैं। इसका फायदा अपराधियों को मिलता है।
आरपीएफ व जीआरपी ने समन्वय बनाकर झांसी रेलवे स्टेशन के पीड़ितों के लिए नियम बना रखा है। नियम के अनुसार आरपीएफ घायल, जहरखुरानी या अन्य पीड़ित व जीआरपी शवों को मेडिकल कॉलेज ले जाएगी। मगर, अक्सर इस नियम को लेकर दोनों के बीच विवाद होता रहता है।
यही विवाद शनिवार की सुबह भी देखने को मिला। आरपीएफ ने अपनी जिम्मेदारी से हाथ पीछे खींच लिए। एक आरपीएफ अफसर ने बताया कि भारतीय रेल में कहीं नियम नहीं है कि आरपीएफ मरीजों को अस्पताल पहुंचाए। मगर, पुराने अफसर झांसी में यह नियम बना गए हैं, जिनका वह पालन करने की पूरी कोशिश करते हैं।
वहीं, जीआरपी इंस्पेक्टर रवि चंद्र मिश्र ने बताया कि चुनाव के कारण उनके पास फोर्स नहीं है। इसके बाद भी उनका जवान दंपति को लेकर मेडिकल कॉलेज गया। आरपीएफ को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।