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कोरोना का असर जानने के लिए रोज हो रहीं खून की 500 जांचें

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झांसी। कोरोना काल में संक्रमण के असर को जानने के लिए होने वाली खून की जांचों में एकदम से उछाल आया है। अब रोजाना 500 लोग इंफ्लेमेट्री मार्कर्स की जांच करा रहे हैं। इससे संक्रमण से शरीर को होने वाले नुकसान का पता लगाया जाता है। फिर उसी हिसाब से इलाज शुरू होता है। वहीं, जांचों की मांग बढ़ती देखकर पैथोलॉजी कर्मचारियों ने भी कलेक्शन चार्ज पांच गुना कर दिया है।
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कोरोना के रोजाना 700-800 से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। इसमें लगभग 80 प्रतिशत मरीज होम आइसोलेशन में रहते हैं। वह डॉक्टरों के संपर्क में रहकर कोविड प्रोटोकॉल के तहत दवाइयां खाते रहते हैं। इसके अलावा चिकित्सकों से सलाह लेते रहते हैं। कोरोना पॉजिटिव मरीज शरीर में संक्रमण से होने वाले नुकसान का पता लगाने के लिए इंफ्लेमेट्री मार्कर्स की जांच भी खूब कराने लगे हैं। इसमें एलडीएच, फेरेटिन, सीआरपी, डी-डाइमर आदि की जांच की जाती है और पता लगाया जाता है मानक से कौन सी चीज कितनी बढ़ी हुई है। इसके आधार पर ही उपचार शुरू होता है। वहीं, इंफ्लेमेट्री मार्कर्स के अलावा अन्य खून की जांचें जैसे सीबीसी, एलएफटी, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल, एचबी ए-1 सी, थाइरॉयड, विडाल आदि जांचें भी करा रहे हैं।
बताया गया कि कोरोना संक्रमण का असर पता करने के लिए ही लगभग 500 लोग खून की जांच करा रहे हैं। ऐसे में पैथोलॉजी कर्मचारियों ने भी होम कलेक्शन चार्ज बढ़ा दिया है। पहले जो 100 रुपये था, वह अब बढ़कर 500 रुपये हो गया है।
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किस जांच का कितना शुल्क
जांच दर (रुपये)
इंफ्लेमेट्री मार्कर्स 3500-4000
विडाल टेस्ट 100
सीबीसी 300
एलएफटी-केएफटी 600
लिपिड प्रोफाइल 600
एचबी ए-1 सी 600
थायरॉयड 500
मलेरिया पैरासाइट 200
इंफ्लेमेट्री मार्कर्स से पता लगता है कि संक्रमण के कारण मरीज के शरीर में क्या-क्या समस्या हो गई हैं। इसी के हिसाब से इलाज किया जाता है। मेडिकल कॉलेज में भर्ती कोरोना मरीजों की सभी जांचें कराई जा रही हैं। - डॉ. मयंक सिंह, पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
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