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आरकेएस के ऑडिट में भी अस्पताल लापरवाह

Fri, 08 Jan 2016 01:20 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। रोगी कल्याण समिति को लेकर जिला पुरुष और महिला अस्पताल कितने लापरवाह हैं, इसकी एक और बानगी सामने आई है। समिति के गठन के बाद से ही दोनों अस्पतालों ने इसका ऑडिट ही नहीं कराया है।
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रोगी कल्याण समिति के लिए शासन स्तर से प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है, जिसका हर साल ऑडिट भी कराया जाना आवश्यक होता है। सन् 2008 में जिला पुरुष और महिला अस्पताल में रोगी कल्याण समिति गठित हुई थी। इसके बाद शासन स्तर से अस्पतालों को लगातार बजट भी उपलब्ध कराया जाता रहा।

वहीं, अस्पतालों द्वारा भी बजट का पैसा खर्च किया जाता रहा लेकिन उसका ऑडिट कराने की जहमत उठाना जरूरी नहीं समझा। लापरवाही की हद पार करते हुए जिला पुरुष और महिला अस्पताल ने सात साल बीत जाने के बाद भी रोगी कल्याण समिति को भेजे गए पैसे का ऑडिट नहीं करवाया है।
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इससे कितनी राशि कहां खर्च हुई, इसका पता नहीं है। दिलचस्प बात तो यह है कि शासन स्तर से बार-बार रिमाइंडर भेजकर ऑडिट कराकर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के आदेश जारी हो रहे हैं, मगर दोनों अस्पतालों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रहा।

गौरतलब है कि रोगी कल्याण समिति को आवंटित बजट से रोगी के हितों के लिए राशि व्यय की जाती है। जिसके जरिए सुदृढ़ जल आपूर्ति, ससमय विद्युत आपूर्ति, अस्पताल परिसर का सौंदर्यीकरण, जीवन रक्षक औषधियां, पर्यावरण स्वच्छता हेतु व्यय, आकस्मिकता की स्थिति में रोगियों का संदर्भन, स्वास्थ्य संबंधी संदेशों की रंगाई-पुताई, रोगी व तीमारदारों हेतु प्रतीक्षा कक्ष एवं शिकायत निवारण प्रकोष्ठ की स्थापना आदि की व्यवस्था कराई जाती है।

‘कई बार जिला पुरुष और महिला अस्पताल को मौखिक और लिखित रूप से ऑडिट कराने की बात कही जा चुकी है। ऑडिट उन्हीं को करवाना है, इसलिए अब पुन: अस्पतालों को पत्र लिखा जाएगा।’ - डॉ. विनोद कुमार यादव, सीएमओ
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