फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

काम पर लौटे कामगार, घूमे मशीनों के चक्के

विज्ञापन
कामगार - फोटो : ??????
विज्ञापन
झांसी। मजदूरों के आवागमन का सिलसिला एक बार फिर से शुरू हो गया है। इसके साथ ही कारोबार अपनी रफ्तार पकड़ने लगे हैं। जिले में एक सैकड़ा क्रशर फिर से चल पड़े हैं। अलग - अलग प्रदेशों से आए मजदूरों ने अपना काम संभाल लिया है। इसके अलावा जिले से भी लगभग पांच हजार मजदूर अन्य प्रदेशों में अपने काम पर वापस लौट गए हैं।
विज्ञापन

कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए लागू किए गए लॉकडाउन की वजह से कारोबार ठप हो गए थे और उनमें काम करने वाले श्रमिक बेरोजगार हो गए थे। मुंबई, दिल्ली, इंदौर, सूरत आदि स्थानों से जिले के चौंतीस हजार प्रवासी मजदूर वापस लौट आए थे, जबकि यहां आने वाले लगभग आठ हजार मजदूरों ने अपने गृह जनपदों की ओर रवानगी ले ली थी। इनमें से ज्यादातर मजदूर क्रशरों पर काम करने वाले थे। लेकिन, लॉकडाउन खुलने के बाद से हालातों का सामान्य होना शुरू हो गया था, जो अब नजर भी आने लगा है। जिले में एक सैकड़ा क्रशरों पर फिर मशीनों की घनघनाहट सुनाई देने लगी है। पत्थरों को तोड़कर गिट्टी बनाने का काम चल पड़ा है। क्रशरों पर झांसी व आसपास के मध्य प्रदेश के जिलों के अलावा अन्य प्रदेशों से भी मजदूरों का लौटना शुरू हो गया है। क्रशरों के चलने से तीन हजार से अधिक मजदूरों की रोजी - रोटी का सीधे जुगाड़ हो गया है। इसके अलावा पत्थरों को क्रशर तक लाने और तैयार गिट्टी को ट्र्रक - डंपर के जरिये गंतव्य तक पहुंचाने में बड़े पैमाने पर लोग लगे हुए हैं। इस काम में जुटे लगभग दो हजार लोगों के खाली हाथों में एक बार फिर से रोजगार पहुंच गया है।
पांच हजार प्रवासी श्रमिक वापस लौटे काम पर
झांसी। लॉकडाउन की शुरुआत के साथ ही बाहरी प्रदेशों में काम कर रहे प्रवासी श्रमिकों का झांसी पहुंचना शुरू हो गया था। तमाम मजदूर सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर यहां पहुंचे थे। चौंतीस हजार से अधिक मजदूरों ने यहां दस्तक दी थी। लेकिन, अब अच्छी बात ये है कि ये प्रवासी श्रमिक वापस अपने काम पर लौटने लगे हैं। लौटकर झांसी आए पांच हजार से अधिक मजदूरों ने वापस बाहरी प्रदेशों की राह पकड़ ली है। इनमें से ज्यादातर मजदूर दिल्ली की कंपनियों में पहुंचे हैं। कंपनियों की ओर से अन्य मजदूरों को भी बुलाया जा रहा है। संभावना है कि जल्द ही भारी संख्या में प्रवासी श्रमिक वापसी कर सकते हैं।
विज्ञापन

सालाना पांच सौ करोड़ का है क्रशर उद्योग
झांसी। बुंदेलखंड का सबसे बड़ा उद्योग क्रशर है। अकेले झांसी जिले में क्रशर उद्योग का सालाना पांच सौ करोड़ का टर्नओवर है। स्टोन क्रशर एसोसिएशन एंड माइनिंग एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अशोक कुमार आनंदानी ने बताया कि एक सैकड़ा क्रशर अब तक चल पड़े हैं। निर्माण शुरू होने की वजह से ऑर्डर भी आने लगे हैं। खासतौर पर लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर व इटावा से भारी मात्रा में मांग आ रही है। तीन हजार श्रमिक सीधे तौर पर काम पर लग गए हैं। ये संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
साहब, परिवार का पेट पालने के लिए काम तो करना ही है। क्रशर बंद होने पर अपने गांव वापस लौट गए थे। शुरू हुए तो फिर आ गए। जब सब ठीक हो जाएगा तो परिवार भी साथ ले आएंगे।
- शिशुपाल, भीलवाड़ा
कोरोना से ज्यादा चिंता अपने और परिवार के पेट की है। इसलिए काम पर वापस लौटना पड़ा। मजदूरी मिलने लगी है, परिवार भी पलने लगा है। यही उम्मीद है कि अब दुबारा से काम बंद न हो।
- प्रकाश, इंदौर
हम लोग तो रोज कमाने खाने वाले हैं। कोई जमा पूंजी तो हाथ में होती नहीं है। क्रशर बंद होने से रोटी का संकट खड़ा हो गया था। कितने दिन दूसरों पर मोहताज रहते। अब हाथ में काम आ गया है।
- राकेश, ग्वालियर
काम है तो जिंदगी है। जब काम नहीं रहेगा तो खाएंगे क्या? क्रशर शुरू हो गए हैं और मजदूरी मिलने लगी है। अब इन्हें बंद नहीं किया जाना चाहिए। गांव में काम होता तो यहां क्यों आते?
विज्ञापन

- परमा, जखौरा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें