रेलवे अनुबंध पर लेगा राजस्व और वन विभाग के रिटायर्ड अधिकारियों की सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। नई रेल लाइन बिछाने सहित अन्य विकास कार्यों में रेलवे को भूमि अधिग्रहण करने के दौरान विवादों से जूझना पड़ता है। तीसरी लाइन के निर्माण में भी मंडल के कई सेक्शन में रेलवे इन्हीं विवादों में उलझा है। ऐसे में चौथी रेलवे लाइन के निर्माण में भूमि विवाद बाधा न बनें, इसके लिए अब राजस्व और वन विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों की मदद ली जाएगी। रेलवे अधिकारियों से दो साल का अनुबंध कर इनकी सेवाएं लेगा।
बीना से धौलपुर तक चौथी रेल लाइन बिछाने का सर्वे पूरा हो चुका है। अब मुख्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद ट्रैक बिछाने का काम शुरू हो जाएगा। इसके लिए पूरे मंडल में भूमि अधिग्रहण भी होना है। लेकिन, रेलवे अन्य मामलों की तरह इस बार भूमि अधिग्रहण करने से पहले सभी भूमि सीमांकन पुख्ता कर लेना चाहता है। ताकि बाद में काम भूमि विवाद में न अटके। इसके लिए रेलवे ने राजस्व और वन विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों के अनुभव का इस्तेमाल करने के लिए उनसे अनुबंध करने का निर्णय लिया है। इसको लेकर रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर ई (एन) यूके तिवारी ने बताया कि जिन मंडल में रेलवे के विकास कार्यों के लिए भूमि अधिग्रहण होना है, वहां राज्य सरकार के राजस्व और वन विभाग के रिटायर्ड अधिकारियों की नियुक्ति 2 साल के अनुबंध पर की जाएगी।
तीसरी लाइन के भूमि विवाद में यहां फंसा था पेच
तीसरी लाइन के काम में वन विभाग दतिया-सोनागिर, आंतरी-संदलपुर और मुरैना-धौलपुर के बीच 20 किमी क्षेत्र में अपनी भूमि पर काम रुकवा चुका है। यहां सीमांकन विवाद था, इसे राजस्व विभाग के हस्तक्षेप से सुलझाया जा सका। वहीं, जाखलौन-धौर्रा के बीच भी तीसरी लाइन का काम एएसआई ने रुकवा दिया है।