झांसी। गश्त पर हैं। दबिश चल रही है। चेकिंग हो रही है। शांति व्यवस्था में ड्यूटी लगी है। आमतौर पर जब भी आप बात करेंगे तो पुलिस इंस्पेक्टर और थानेदारों का यही जवाब होता है। थाने पर आमद और रवानगी के नाम पर भी झूठ बोला जाता है। इतना ही नहीं जिस प्वाइंट पर ड्यूटी लगाई जाती है वहां से भी गायब हो जाते हैं। यह हम नहीं कह रहे बल्कि पुलिस कप्तान के निरीक्षण में यह तस्वीर आए दिन सामने आ रही है।
केस वन:
अग्निपथ योजना को लेकर होने वाले विरोध को देखते हुए एक दरोगा और तीन सिपाहियों की ड्यूटी रेलवे स्टेशन को जाने वाले रास्ते पर लगाई गई थी। लेकिन 20 जून को जब एसएसपी शिवहरी मीना निरीक्षण के लिए निकले तो दरोगा और सिपाही गायब थे। पता चला कि यह सभी अपने घरों पर चले गए थे। एसएसपी ने इसे बड़ी लापरवाही मानते हुए दरोगा और सिपाहियों को निलंबित कर दिया था।
केस दो:
सीपरी बाजार थाने की चौकी चमनगंज के इंचार्ज ने जो अपनी लोकेशन थाने पर बताई थी उसमें कहा था कि वह चित्रा चौराहे पर चेकिंग कर रहा है। 16 अप्रैल को जब एसएसपी ने लोकेशन चेक कराई तो वह वहां से गायब था। बताया गया कि वह अपने घर पर है। एसएसपी ने तत्काल प्रभाव से चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया था। इतना ही नहीं विभागीय जांच शुरू कराने के भी निर्देश पुलिस अधिकारियों को दिए थे।
केस तीन:
बड़ागांव थानाध्यक्ष से जब पुलिस कप्तान ने लोकेशन पूछी तो बताया कि वह थाने पर मौजूद हैं। यहां कुछ लोग आए हुए हैं उनकी समस्या को सुन रहे हैं। एसएसपी तत्काल थाने पर पहुंच गए। पता चला कि थानाध्यक्ष अपने घर पर हैं। एसएसपी ने थानाध्यक्ष को तत्काल लाइनहाजिर कर दिया था। एक दरोगा ने भी अपनी लोकेशन गलत बता दी थी। उसके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
निरीक्षण को कहकर निकले खाद्य सुरक्षा अधिकारी घर पर थे
झांसी। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अपने दफ्तर के रजिस्टर में दर्ज करके गए कि वह खाद्य पदार्थों की जांच के लिए जा रहे हैं। कुछ सैंपल लिए जाने हैं। शुक्रवार की सुबह को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार जब एफडीए के आफिस पहुंचे तो यहां रजिस्टर भी चेक किए। रजिस्टर में लिखा था कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी चेकिंग के लिए गए हुए हैं। उन्नाव गेट पर सैंपल लेने की बात लिखी गई थी। जब डीएम ने चेकिंग कराई तो दोनों अपने घरों पर थे। डीएम ने दोनों का स्पष्टीकरण तो तलब किया ही है वेतन भी रोक दिया गया।