झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में अब डॉक्टरों की निगरानी में ही रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया जाएगा। रोज कंसल्टेंट से इंजेक्शन लगाने के संबंध में पूछताछ भी की जाएगी। डॉक्टर को पुष्टि करनी होगी कि मरीज को उसके सामने ही इंजेक्शन लगाया गया है। इंजेक्शन चोरी करने के गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने ये फैसला लिया है।
शनिवार को पुलिस ने मेडिकल कॉलेज, निजी अस्पताल और मेडिकल स्टोर में काम करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कि मेडिकल कॉलेज से रेमडेसिविर इंजेक्शन चुराने और खाली शीशियों में एंटीबायोटिक का घोल भरकर बेचते थे। चूंकि, चोरी सीधे मेडिकल कॉलेज में शासन की तरफ से मुहैया कराए जा रहे इंजेक्शन की हो रही थी। ऐसे में हड़कंप मच गया। कॉलेज प्रशासन ने आगे इस तरह की घटना न हो सके, इसलिए फैसला लिया है कि अब कोविड अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति में ही स्टाफ नर्स रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाएंगी। एक-एक इंजेक्शन की पुष्टि चिकित्सक को ही करनी होगी।
...इसलिए लगातार मरते गए मरीज
कोरोना के इलाज के दौरान मरीज को सही समय पर रेमडेसिविर इंजेक्शन लग जाने के बावजूद कई मरीजों की मौत हो गई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि रेमडेसिविर कोई रामबाण नहीं है। इसका फायदा हो भी सकता है और नहीं भी। मगर कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें मरीज की रेमडेसिविर इंजेक्शन लगने के बाद भी मौत हो गई।
बायो मेडिकल वेस्ट नष्ट करने में भी लापरवाही
रेमडेसिविर इंजेक्शन की खाली शीशियां मेडिकल कॉलेज या फिर नर्सिंगहोमों से बाहर आने से साफ पता चलता है कि बायो मेडिकल वेस्ट नष्ट करने में भी लापरवाही हो रही है। कोरोना काल में इस तरह की लापरवाही संक्रमण के प्रसार को भी दावत दे रही है।