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रेमडेसिविर नहीं, कोरोना के इलाज में ऑक्सीजन, स्टेरॉयड ज्यादा कारगर

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झांसी। रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर मचे हो-हल्ले के बीच महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने कोरोना के इलाज पर बड़ा बयान दिया है। प्राचार्य ने कहा कि कोरोना के इलाज में सबसे पहले ऑक्सीजन, दूसरे नंबर पर स्टेरॉयड और बाद में हेपरिन देना सबसे कारगर है। उन्होंने कहा कि रेमडेसिविर को लेकर मरीजों को बेवजह परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इससे फायदा हो भी सकता है और नहीं भी।
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प्राचार्य ने बताया कि उनके यहां सबसे ज्यादा कोरोना के गंभीर मरीज भर्ती हो रहे हैं। कोरोना के इलाज में जैसे ही मरीज की ऑक्सीजन लेवल 93 के नीचे जाने लगता है तो फिर ऑक्सीजन देना सबसे पहले जरूरी होता है। इसके बाद स्टेरॉयड में मिथाइल प्रेडनीसोलोन या फिर प्रेडनीसोलोन, डेक्सा मेथासॉन देते हैं। बाद में हेपेरिन दी जाती है। इससे ही अधिकतर मरीज ठीक भी हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि चाहें रेमडेसिविर हो या टॉक्लीजुमैब, ये दवाइयां सिद्ध नहीं हैं। किसी को रेमडेसिविर से फायदा हो भी सकता है और नहीं भी। मेडिकल कॉलेज में कई गंभीर मरीज बिना रेमडेसिविर के भी ठीक हो रहे हैं। ऐसे में इंजेक्शन को लेकर मरीज परेशान न हो। बस सही समय पर सही इलाज मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि संक्रमण हुए 10 दिन बीत गए हैं तो रेमडेसिविर नहीं लगाया जाना चाहिए। प्लाज्मा थेरेपी भी शुरूआती दौर में हो जानी चाहिए। सात-दस बाद ये भी असरदार नहीं होती। उन्होंने कहा कि इसी तरीके से मेडिकल कॉलेज के कई गंभीर मरीजों की जान भी बचाई गई है।
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ये भी दिया सुझाव
- 93 से कम होने पर तुरंत ऑक्सीजन दी जाए।
- इसके बाद स्टेरॉयड और हेपेरिन शुरू किया जाए।
- कोविड मरीज पेट के बल लेटे, थके तो बायीं या दायीं करवट लें।
- सांस की कसरत भी करनी है। इससे गंभीर स्थिति से बच सकते।
- मरीज स्पायरोमीटर से अंदर सांस खींचे, जितना हो सके उसे रोंकें।
- शुरूआत में ही कोरोना की पुष्टि होने पर व्यायाम भी करें।
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