झांसी। ऊंची कीमत मेें रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने वाले तीन युवक प्रेमनगर पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पूछताछ के दौरान मालूम चला कि एक युवक अपने मौसा के इलाज के लिए इंजेक्शन लेकर आया था लेकिन, उनकी मौत के बाद बचे इंजेक्शन अपने दोस्तों की मदद से ऊंची कीमत में जरूरतमंदों के बीच बेच रहा था। आज यह लोग दो इंजेक्शन बेचने निकले थे कि पुलिस के हत्थे चढ़ गए। लिखा-पढ़ी के बाद पुलिस ने सभी को जेल भेज दिया।
कोरोना वायरस की दूसरी लहर के साथ ही रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग एकाएक बढ़ गई। कालाबाजारी इसका फायदा उठाने के लिए इन दिनों सक्रिय हैं। तीन युवक शनिवार को प्रेमनगर पुलिस के हत्थे चढ़ गए। एसपी सिटी विवेक त्रिपाठी के मुताबिक ओवेश खान (30) निवासी सूद कॉलोनी ने अपने मौसा के इलाज के लिए आठ रेमडेसिविर इंजेक्शन लाए थे। उसके मौसा को तीन इंजेक्शन लगे लेकिन, उनकी मौत हो गई। इसके बाद ओवेश के दोस्तों ने बचे पांच इंजेक्शन बाजार में बेेचने की सलाह दी। ओवेश उनकी बातों में आ गया। उसने अपने दोस्त रोहित कुमार (27) निवासी वीरांगना नगर एवं अंशुल तिवारी (25) निवासी मेडिकल कॉलेज के साथ मिलकर तीन इंजेक्शन चालीस-चालीस हजार रुपये में बेच दिए। पुलिस के मुताबिक रोहित और अंशुल ही ग्राहक तलाशने का काम करते थे। आज दो इंजेक्शन के लिए भी सौदा हो गया था। तीनों एक एक्टिवा गाड़ी में बैठकर इसे ग्राहक को चालीस हजार रुपये में बेचने जा रहे थे। औषधि निरीक्षक उमेश भारती ने इसकी सूचना पुलिस को दी। प्रेमनगर पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। इंस्पेक्टर रणविजय सिंह ने बिचौली के पास डगिरया रोड के पास घेरा बनाकर तीनों को वहीं से पकड़ लिया। पुलिस ने तलाशी के बाद दो इंजेक्शन बरामद किए हैं। तीनों के खिलाफ औषधी एवं प्रसाधन अधिनियम, आपदा प्रबंधन एवं महामारी एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करके पुलिस ने तीनों को जेल भेज दिया। इसके पहले पिछले शनिवार को एसओजी ने नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने के साथ उसकी कालाबाजारी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। गिरोह के सात सदस्य पकड़े गए थे जबकि एक अभी तक फरार चल रहा है। उधर, औषधि निरीक्षक उमेश भारती का कहना है कि इंजेक्शन की आपूर्ति की निरंतर निगरानी की जा रही। कालाबाजारी की कोशिश के करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हो रही है।