-डॉ. सेंगर के हटने के बाद नेफ्रोलॉजी विभाग में बचे एक ही चिकित्सक, किडनी रोगियों का इलाज भी होगा प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में कार्यवाहक प्रधानाचार्य के डीजीएमई (चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय) से संबद्ध होने के बाद अब विभाग में कोई भी नियमित नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं बचा है। ऐसे में डीएम नेफ्रोलॉजी कोर्स शुरू होने की उम्मीद को झटका लग सकता है। इसके साथ ही किडनी के मरीजों का उपचार भी प्रभावित हो सकता है। वहीं, जेई विद्युत के निलंबन के बाद कॉलेज में अब कोई अवर अभियंता नहीं बचा है। जल्द नए की तैनाती न होने से काम भी ठप हो सकते हैं।
मेडिकल कॉलेज में कार्यवाहक प्रधानाचार्य के साथ-साथ डॉ. एनएस सेंगर लंबे समय से नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष का भी दायित्व संभाल रहे थे। उनके अलावा नेफ्रोलॉजी विभाग में कोई दूसरा चिकित्सक भी नहीं था। मगर इसी साल शासन से बॉन्ड पर एक चिकित्सक की दो साल के लिए तैनाती हो गई। अब चूंकि, एसएनसीयू में आग लगने की घटना के बाद डॉ. सेंगर को हटा दिया गया है। वह चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय में संबद्ध रहेंगे। ऐसे में विभाग में कोई भी नियमित डॉक्टर नहीं बचेगा। बुंदेलखंड में किडनी के भी बहुत मरीज हैं। रोजाना 40 से 50 मरीज ओपीडी में दिखाने के लिए आते हैं। वरिष्ठ चिकित्सक न होने से किडनी के मरीजों का उपचार भी प्रभावित होगा।
हाल ही में कॉलेज की तरफ से नेशनल मेडिकल काउंसिल में डीएम नेफ्रोलॉजी कोर्स शुरू करने के लिए आवेदन किया गया है। ऐसे में नियमित नेफ्रोलॉजिस्ट तैनात न होने से कोर्स शुरू करने की मंजूरी मिलना कठिन है। वहीं, मेडिकल कॉलेज में विद्युत, सिविल और मेकेनिकल विभाग में जूनियर इंजीनियर का पद सृजित हैं। मौजूदा समय में विद्युत विभाग में ही एक जेई संजीत कुमार की तैनाती थी। जेई के निलंबन के बाद अब कोई अवर अभियंता कॉलेज में नहीं बचा है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में विद्युत, निर्माण के काम ठप हो सकते हैं।
शासन से दो जेई की तैनाती की मांग
झांसी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक को पत्र लिखकर दो जेई की तैनाती की मांग की है। प्रधानाचार्य की तरफ से लिखे पत्र में कहा गया है जेई विद्युत को निलंबित कर महानिदेशालय से संबद्ध कर दिया गया है। इस कारण अवर अभियंता विद्युत से संबंधित कार्य के लिए किसी की तैनाती नहीं है। अवर अभियंता सिविल का भी पद रिक्त चल रहा है। ऐसे में अवर अभियंता विद्युत और सिविल की तैनाती की जाए। जब तक महानिदेशालय से तैनाती नहीं होती है। तब तक किसी अन्य विभाग से इन दोनों विभागों में जेई को तैनात करने की मांग डीएम से की गई है।