अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। नगर निगम के कार्यकारिणी चुनाव में भाजपा को चुनाव से पहले पार्षदों की बगावत का सामना करना पड़ा। कार्यकारिणी का टिकट न मिलने से नाराज नामांकन करने वाले दो और पर्चा खरीदने वाले एक पार्षद को किसी तरह मनाया गया। विपक्ष के दो प्रत्याशी उतारने पर जब मतदान की नौबत आ गई तो क्रॉस वोटिंग भी हुई। फिर भी भाजपा पांच सीटें जीतने में कामयाब हो गई। विपक्ष से जहां निर्दलीय प्रत्याशी जीते। वहीं, बीएसपी के प्रत्याशी को हार मिली।
नगर निगम कार्यकारिणी के छह सदस्यों का दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर सोमवार को चुनाव हुआ। चुनाव से पहले नगर निगम के सामने निजी होटल में भाजपा के सभी पार्षदों के साथ जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की सुबह 11 बजे से बैठक शुरू हुई। इसमें मेयर बिहारी लाल आर्य, एमएलसी डॉ. बाबूलाल तिवारी, एमएलसी रमा निरंजन, महानगर अध्यक्ष हेमंत परिहार शामिल रहे। आधे घंटे बाद सुबह 11:30 बजे महानगर अध्यक्ष ने घोषणा की कि लखन कुशवाहा, भरत सेन, बालस्वरूप साहू, नरेंद्र किशोर और रश्मि अहिरवार को पार्टी की ओर से चुनाव लड़ेंगे।
दोपहर 12 बजे तक ही नामांकन पत्र लेने का समय था। ऐसे में तुरंत होटल से निकलकर पार्षद नगर निगम पहुंचे और नामांकन पत्र लिए। हालांकि, पहले ही विपक्ष की ओर से निर्दलीय प्रत्याशी विकास खत्री और बसपा के उमेश जोशी नामांकन कर चुके थे। भाजपा से कार्यकारिणी का टिकट न मिलने से नाराज पार्षद रामजी यादव, रितिका तिवारी और अरविंद झा ने भी नामांकन पत्र ले लिए। रामजी और रितिका ने तो नामांकन भी कर दिया।
रामजी के प्रस्तावक कामेश अहिरवार तो रितिका की प्रस्तावक पूजा श्रीवास बनीं। अरविंद झा, एमएलसी डॉ. बाबूलाल तिवारी और महानगर अध्यक्ष हेमंत परिहार के समझाने पर मान गए और नामांकन नहीं किया। अब भाजपा में दोनों बागी पार्षदों को मनाने का दौर शुरू हुआ। पहले रितिका तिवारी ने पर्चा वापस ले लिया। फिर नाम वापसी का समय खत्म होने के करीब 15 मिनट पहले रामजी यादव ने भी पर्चा वापस ले लिया।
अब विपक्ष से एक प्रत्याशी के नाम वापस लेने की कोशिशें शुरू हुईं। ऑफर भी दिया गया कि विकास और उमेश दोनों पर्ची डालकर एक नाम निकाल लें, जिसका निकलेगा, वो चुनाव लड़े। जबकि, विपक्ष की ओर से कहा जाने लगा कि भाजपा एक सीट छोड़ दे। इसे लेकर कार्यकारिणी कक्ष में भाजपा के एक वरिष्ठ पार्षद और बसपा के पार्षद के बीच कहासुनी भी हो गई। उमेश कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं हुए। ऐसे में चुनाव में मतदान की स्थिति बन गई। सभी नामांकन पत्र वैध मिलने पर दोपहर 2:30 बजे से वोटिंग शुरू हुई। साढ़े चार बजे तक वोट डाले गए।
सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी अखिल कुमार पांडेय ने बताया कि 65 वोट डाले गए। इनमें से 64 सही और एक मत अमान्य मिला। इसके बाद वोटों की गिनती हुई। 10-10 वोट मिलने पर नरेंद्र किशोर नीलू, बाल स्वरूप साहू, रश्मि अहिरवार और नौ-नौ वोट पाकर लखन कुशवाहा और भरत सेन कार्यकारिणी सदस्य निर्वाचित हो गए। जबकि, विपक्ष की ओर से निर्दलीय विकास खत्री 10 वोट पाकर कार्यकारिणी में पहुंच गए। वहीं, बसपा के प्रत्याशी उमेश जोशी को छह वोट मिले। इस कारण वो चुनाव नहीं जीत पाए।
हालांकि, भाजपा का एक पार्षद ने क्रॉस वोटिंग करके उमेश के पक्ष में मतदान कर दिया। वहीं, निर्वाचित सदस्यों को महापौर बिहारी लाल आर्य, नगर आयुक्त सत्य प्रकाश ने बधाई दी। इस दौरान सदन प्रभारी डॉ. राघवेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।
कौन किसका प्रस्तावक बना
प्रत्याशी प्रस्तावक
लखन कुशवाहा दिनेश प्रताप सिंह
भरत सेन हरिओम मिश्रा
रश्मि अहिरवार नरेंद्र नामदेव
बाल स्वरूप साहू प्रदीप खटीक
नरेंद्र किशोर तरुण शाक्या
विकास खत्री कन्हैया कपूर
उमेश जोशी महेश गौतम
पांचवीं सीट जिताने को मेयर के साथ अध्यक्ष डाले रहे डेरा
कार्यकारिणी चुनाव में पदेन सदस्य विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह और सदर विधायक रवि शर्मा शहर से बाहर होने की वजह से वोट डालने नहीं आए। ऐसे में भाजपा के पास 50 वोट थे। दूसरी तरफ, पार्टी में बगावत के सुर उठते देखने भाजपा नेताओं को क्रॉस वोटिंग का डर भी सता रहा था। ऐसे में मेयर बिहारी लाल आर्य के साथ-साथ महानगर अध्यक्ष हेमंत परिहार दिनभर नगर निगम में डेरा डाले रहे। सभी प्रत्याशियों के नाम के साथ नौ-नौ पार्षदों की सूची बनाई गई। फिर एक-एक कर वोट डलवाए गए। मेयर और अध्यक्ष की ये रणनीति काम आई और भाजपा पांचवां प्रत्याशी जिताने में कामयाब हो गई।
मतपेटी से निकले छह सादे कागज, एक पार्षद से मतपत्र लिया
मतगणना के दौरान छह सादे कागज निकले, जो कि चर्चा का विषय बने रहे। इसके अलावा, भाजपा पार्षद राहुल कुशवाहा ने वोटिंग के दौरान सादा कागज डाल दिया और मतपत्र हाथ में लिए रहे। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें टोका और मतपत्र ले लिया। विपक्ष के पार्षद वो अमान्य करने की बात कहकर हंगामा करने लगे। दूसरी तरफ, भाजपा पार्षद कहने लगे कि कुर्ता की जेब में रखा कागज धोखे से पार्षद ने डाल दिया है। उसे वोट डालने दिया जाए। हालांकि, बाद में मत अमान्य कर दिया गया।