झांसी। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को सुबह नाश्ते में कच्चा दूध दिया जाता है। इसके साथ कभी कभार दलिया दे दी जाती है तो कभी नहीं। दोपहर का भोजन भी देर से मिलता है। इससे मरीजों के साथ-साथ तीमारदारों को भी परेशानी होती है। खाना आने की आस में मरीज घंटों बैठे रहते हैं।
अमर उजाला ने सोमवार को जिला अस्पताल में मरीजों को भोजन मिलने की व्यवस्था की पड़ताल की तो कई जगह खामियां उजागर हुईं। बातचीत में मरीजों ने बताया कि सुबह नौ बजे दूध का पैकेट दे दिया गया है। इसे उबालने की कोई व्यवस्था नहीं है। इस वजह से कई मरीजों ने पैकेट का दूध किनारे रख दिया। मरीजों को दूध के साथ दलिया भी नहीं दिया गया, जबकि मेन्यू चार्ट में यह देने का नियम है। दोपहर दो बजे तक मरीजों को भोजन भी नहीं दिया गया था। मरीजों ने मांग की कि उन्हें दोपहर 12 से एक बजे के बीच में भोजन दिया जाए।
जिला अस्पताल का किचन सिर्फ एक कुक के भरोसे चल रहा है। 30 नवंबर को आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों का अनुबंध खत्म होने के बाद दो कुक व अन्य कर्मचारी हट गए हैं। व्यवस्था के संचालन के लिए तीन वार्ड आया को आटा माड़ने, रोटी बेलने व सेंकने समेत अन्य कामों में लगाया गया है। अस्पताल में प्रतिदिन 250 मरीजों व तीमारदारों का भोजन बनता है। स्टाफ लंबे समय से रोटी सेकने की मशीन की मांग कर रहा है मगर खरीदी नहीं जा सकी है।
जिला अस्पताल में डॉक्टर मरीजों को बाहर की गिनी-चुनी दवाएं और इंजेक्शन लिख रहे हैं। स्थिति ये है कि एनएस की बोतल तक बाहर से मंगवाई जा रही है। बाहर की दवाएं लिखने में एक-दो डॉक्टर का लंबे समय से नाम आ रहा है लेकिन अस्पताल प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
अभी निजी काम से बाहर आई हुई हूं। मंगलवार को इस बारे में पता लगवाया जाएगा। यदि भोजन देने में किसी भी प्रकार की लापरवाही की जा रही है तो कार्रवाई की जाएगी। बाहर से दवाएं न लिखने के डॉक्टरों को निर्देश दिए जा चुके हैं। फिर भी यदि डॉक्टर दवाएं लिख रहे हैं तो कार्रवाई होगी। - डॉ. रजनी जसौरिया, सीएमएस।
सुबह नौ बजे स्टाफ आया था और दूध का पैकेट देकर चला गया। इसके साथ दलिया भी नहीं दी। दोपहर डेढ़ बज गए हैं और बिना कुछ खाए पिए बैठे हुए हैं। - कालीचरण, मरीज।
नाश्ते में दूध जरूर मिला है लेकिन इसे उबालने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए दूध को किनारे रख दिया है। दोपहर का भोजन भी काफी देर से मिलता है। - दयाराम, मरीज।
अस्पताल में एनएस की बोतल, इंजेक्शन व दवाएं डॉक्टर बाहर से लिख रहे हैं। तीन-चार दिनों में दो हजार रुपये की दवाएं बाहर से खरीद चुका हूं। - ठाकुरदास, तीमारदार।
डॉक्टर लगातार बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। कोई सुनने और कार्रवाई करने वाला नहीं है। तीन दिन में तीन हजार रुपये की दवाएं बाहर से खरीद ली हैं। - रही सिद्दीकी, तीमारदार।