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रवींद्र के बिगड़े बोल, अपनों को भी नहीं बख्शा

Sat, 16 Apr 2016 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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ravindra shukla, jhansi hindi news - फोटो : amar ujala
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झांसी। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता व  पूर्व मंत्री रवींद्र शुक्ला के बोल कुछ इस तरह बिगड़े कि पत्रकारों के सामने उन्होंने न केवल विरोधी दलों को बल्कि अपनों को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों का ‘भूमाफिया एसोसिएट’ आपस में एकजुट होकर झांसी में अवैधानिक काम करवा रहा है। रोजाना पांच करोड़ रुपये से भी अधिक का क्रिकेट का सट्टा खिलवाया जा रहा है। इसके अलावा जुआं, जमीन, हवाला समेत अनैतिक काम चरम पर है। गुंडाराज का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि दिनदहाड़े एसिड अटैक हुआ।
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गौरतलब है कि भाजपा नेता पर बृहस्पतिवार को सराफा बाजार में जमीन के विवाद को लेकर तेजाब से हमला कर दिया गया था। हमले के ठीक अगले ही दिन पूर्व मंत्री ने कहा कि व्यक्तिगत लड़ाई का तमगा लगाकर कुछ लोग घटना से आक्रोशित कार्यकर्ताओं और जनता के मन में पानी डालने का काम कर रहे हैं। सच यह है कि झांसी के अंदर सभी राजनीतिक दलों में कुछ नेता ऐसे हैं, जो आपसी हित के लिए साठगांठ किए हैं। जमीनों के काम के लिए उनका

‘भूमाफिया एसोसिएट’ एक साथ है। झांसी मेें क्रिकेट का सट्टा चरम पर है। इसमें कॉकस काम कर रहा है। अब जनता को यह कॉकस तोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि वह इन अनैतिक कामों केखिलाफ मोर्चा खोलेंगे। रवींद्र से जब पूछा गया कि उनके दल और विपक्ष के कितने नेता अवैधानिक काम में संलिप्त हैं, तो उन्होंने मीडिया से ही इस मामले को उजागर करने की बात कहते हुए कन्नी काट ली। हालांकि, उन्होंने इस काकस में अपनी पार्टी के नेताओं के न होने की बात भी नहीं कही, इससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि उनके निशाने पर कुछ ‘अपने’ भी हैं।
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रक्षक बन गए भक्षक, कैसे मिले न्याय
रवींद्र ने कहा कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय कैसे मिलेगा।  झांसी की पुलिस खासकर कोतवाली पुलिस की अवैधानिक काम कराने वालों से साठगांठ है। जमीन कब्जा, जुआ, सट्टा, हवाला का काम पुलिस के संरक्षण में हो रहा है। पुलिस इसका प्रतिफल लेती है। पुलिस में छोटे कर्मचारी, जिन्हें सत्ता का खुला समर्थन है वह उच्च अधिकारियों तक की बात नहीं मानते।

इसी के कारण वर्षों से सरकार की स्थानांतरण की नीति के खिलाफ  सिपाही से दरोगा तक एक ही स्थान पर तैनात हैं। उन्होंने राजू कमरया की संपत्ति की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। दो साल में कोतवाली क्षेत्र में हुए प्रकरणों की जिसकी एफआर लगी है, उसकी जांच सेवानिवृत्त जज से या उच्च स्तरीय पैनल से कराई जाए।
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