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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स के फर्जी एरियर भुगतान के मामले की जांच अब तक शुरू नहीं हुई है। कॉलेज प्रशासन द्वारा जांच कमेटी गठित किए दस दिन से भी अधिक समय बीत गया है, इसके बावजूद जांच कमेटी सुस्त रवैया अपनाए है।
आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज से झांसी मेडिकल कॉलेज स्थानांतरित होकर आई स्टाफ नर्स के 3.8 लाख रुपये के एरियर भुगतान का मामला बीते दिनों काफी चर्चा में रहा है। नर्स के एरियर भुगतान में आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के फर्जी हस्ताक्षर का आरोप एक वरिष्ठ बाबू पर है।
इसके साथ ही बाबू द्वारा किस मद से पैसा जारी कर दिया गया, इसकी भी जानकारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन को नहीं है। ट्रेजरी से एरियर का पैसा तो निकाल दिया गया है, लेकिन चिकित्सालय मद में उसकी एंट्री नहीं की गई। एक के बाद एक मामले खुलने पर हरकत में आए मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने दस दिन पूर्व मामले की जांच को तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी थी।
प्राचार्य ने कमेटी को जल्द ही रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद कमेटी द्वारा अब तक जांच शुरू भी नहीं की गई। इससे कमेटी की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है और भ्रष्टाचार को लेकर कमेटी का रवैया भी नरम दिख रहा है। वहीं, कॉलेज प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर का कहना है कि एमसीआई के निरीक्षण व छुट्टियों के कारण जांच शुरू नहीं हो पाई है। जल्द ही कमेटी जांच शुरू करेगी।