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रावण का सशक्त अभिनय कर राधेश्याम बन गए ‘लंकेश महाराज’

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लंकेश महाराज
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झांसी। बुंदेलखंड में रामलीला मंचन की परंपरा काफी पुरानी है। कई ऐसे कलाकार हैं जो वर्षों से एक ही भूमिका में रमे हुए हैं। इनमें से एक है पूंछ के राधेश्याम भारद्वाज उर्फ लंकेश महाराज। यह लगभग 45 वर्षों से देश की कई रामलीलाओं एवं दशहरा कार्यक्रमों में रावण की भूमिका निभाते चले आ रहे हैं। इनका कहना है कि उनके हृदय में प्रभु श्रीराम बसे हैं। लेकिन रावण की भूमिका ऐसी है, जो उन्हें हर जगह लंकेश महाराज के रूप में पहचान दिलाती है।
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मुंबई, ग्वालियर, भोपाल, शिवपुरी, हरियाणा, एटा, मैनपुरी, भोगांव समेत देश के कई स्थानों पर आयोजित रामलीलाओं एवं दशहरा कार्यक्रमों में बुंदेलखंड के पूंछ कस्बे के लंकेश महाराज अपनी अभिनय प्रतिभा से दर्शकों का मन मोहते आ रहे हैं। इनकी अटैची में हमेशा रावण का मुखौटा सहित पूरी ड्रेस रहती है। जहां जनता की मांग हुई, वहीं लंकेश बनने में कोई गुरेज नहीं करते। उन्हें रावण के किरदार में आने के लिए 20 से 30 मिनट ही लगता है। लंकेश महाराज का कहना है कि रावण बनने का असल कारण यह है, कि पहले छोटी - मोटी भूमिकाएं ही मिलती थीं। लेकिन जब रावण बने, तब उनका अभिनय खूब सराहा गया। ऐसे में वह रावण की ही भूमिका निभाने लगे। कई बार लोगों ने कहा, कि वह कुंभकर्ण, मेघनाद सहित अन्य भूमिकाएं भी निभा लें। लेकिन उन्होंने नहीं निर्भाईं। उनके अनुसार भगवान श्रीराम की कथा में भले ही रावण खलनायक है, लेकिन जनता में लोकप्रिय भी है। लंकेश महाराज के अनुसार उनका परिवार खेती बाड़ी कर जीवन यापन करता है।
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