आधार कार्ड लिंक न होने की वजह से शहर में राशन कार्डों से आठ हजार यूनिट हटा दी गई हैं, जिससे इन कार्डधारकों को अगस्त माह का सरकारी राशन नहीं मिल पाया है। मुखिया के साथ परिवार के सभी सदस्यों का आधार नंबर राशन कार्ड से लिंक होने के बाद ही इन्हें राशन दिया जाएगा।
किसी भी जनकल्याणकारी योजना का लाभ लेने के लिए जून से आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद से राशन कार्ड में दर्ज प्रत्येक यूनिट का आधार नंबर राशनकार्ड से लिंक करना जरूरी कर दिया गया है। जबकि, पहले केवल परिवार के मुखिया का आधार नंबर लिंक होने से राशन मिल जाता था। कार्डधारकों को जुलाई में आधार नंबर लिंक कराने का मौका दिया गया था।
बावजूद इसके आठ हजार यूनिट लिंक नहीं हो पाए, जिससे इन्हें सस्ते राशन की सूची से हटा दिया गया है। इन कार्डधारकों का अगस्त माह का राशन नहीं दिया गया है। जिला पूर्ति अधिकारी अनूप तिवारी ने बताया कि राशन कार्ड से आधार नंबर जनसेवा केंद्र या कार्यालय में आकर लिंक कराए जा सकते हैं। इसके बाद अगले महीने से राशन का वितरण सुनिश्चित कर दिया जाएगा।
मुहर की नहीं आवश्यकता
जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि ऑनलाइन आधार नंबर राशन कार्ड से लिंक होने के बाद उस पर कार्यालय की मुहर की आवश्यकता नहीं है। कोटेदार किसी को बेवजह परेशान नहीं करें, बल्कि उपभोक्ता के पास उपलब्ध प्रिंट के आधार पर राशन उपलब्ध कराएं। मालूम हो कि इन दिनों आपूर्ति कार्यालय में प्रिंट पर मुहर लगवाने वालों की भीड़ उमड़ रही है। कोटेदार उन्हें बगैर कार्यालय की मुहर के राशन देने से इंकार कर रहे हैं, जिससे परेशान लोग कार्यालय की ओर दौड़ रहे हैं।
किसी भी सदस्य का चलेगा बायोमेट्रिक
नरसिंह राव टौरिया निवासी लीला सरकारी राशन नहीं मिलने से परेशान हैं। इसकी वजह उनके अंगूठे का बायोमेट्रिक मशीन से मिलान नहीं हो पाना है। ये केवल एक महिला की परेशान नहीं है, बल्कि तमाम ऐसे कार्डधारक हैं, जिनको बायोमेट्रिक समस्या से जूझना पड़ रहा है। जिला पूर्ति अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि परिवार के मुखिया के अलावा किसी भी सदस्य को बायोमेट्रिक से राशन दिया जा सकता है। कोटेदार किसी को लौटाएं नहीं।
और भी समस्याओं से जूझ रहे हैं उपभोक्ता
रियायती दरों पर सरकारी राशन हासिल करना तमाम उपभोक्ताओं के लिए आसान नहीं है। उन्हें विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। किसी का आधार नंबर सही, तो नाम गलत आ रहा है। कोई किराये के मकान में रहता है तो किरायानामा विभाग को नहीं दे पा रहा है।