झांसी। लक्ष्मी ताल के बीचोंबीच वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा बनाई जाएगी। पर्यटन विकास की दृष्टि से बनाई गई इस योजना का खाका तैयार कर लिया गया है। ढाई करोड़ की लागत से योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा।
शहर में आने वाले पर्यटक किला, रानी महल व अन्य पुरातात्विक इमारतों तक ही सीमित रह जाते हैं। चंद घंटों की सैर सपाटा के बाद वे यहां से निकल जाते हैं। इससे यहां पर्यटन उद्योग के रूप में विकसित नहीं हो पा रहा है लेकिन अब इस कमी को पूरा करने की तैयारी तेजी से जारी है। लक्ष्मी ताल के पर्यटन विकास का काम शुरू कर दिया गया है। इसके पहले चरण में ताल का गंदा पानी निकाल दिया गया है और जलकुंभी भी साफ कर दी गई है। ताल में नालों का गंदा पानी न गिरे, इसके लिए नालों का मार्ग परिवर्तित किया जा रहा है। गंदे पानी की सफाई के लिए ट्रीटमेंट प्लांट तैयार हो रहा है। यहां से पानी को साफ कर ताल में डाला जाएगा।
ताल की खूबसूरती को चार चांद लगाने की एक और योजना तैयार कर ली गई है। ताल के बीचोंबीच सवा सौ फीट व्यास का गोल प्लेटफार्म बनाया जाएगा। इस पर वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। प्रतिमा स्थल के इर्दगिर्द बेंच लगाई जाएंगी। आकर्षक लाइटिंग और फव्वारे होंगे। मेरठ की एक एजेंसी से इसकी डीपीआर तैयार करा ली गई है। इस पर ढाई करोड़ रुपये की लागत आएगी। प्रतिमा अष्टधातु या तांबे की होगी, ये तय होना अभी बाकी है।
नाव से होगा आना-जाना
प्रतिमा स्थल तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना होगा। इसके लिए ताल के दो किनारों पर प्लेटफार्म बनाए जाएंगे। यहां से लोग नाव पकड़कर प्रतिमा स्थल तक पहुंच सकेंगे। इसके लिए उन्हें निर्धारित किराया अदा करना होगा। उल्लेखनीय है कि पहले प्रतिमा स्थल तक पहुंचने के लिए पीपा पुल बनाने की योजना बनाई गई थी लेकिन इसे खारिज कर नाव की योजना बनाई गई। इससे नाविकों को रोजगार मिलेगा। साथ ही बेवजह लोग प्रतिमा स्थल पर भी नहीं पहुंच सकेंगे।
पर्यटन का केंद्र होगा इलाका
लक्ष्मी ताल के पास स्थित राजकीय उद्यान नारायण बाग का भी विकास किया जा रहा है। इसे लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा ताल के पास नये उद्यान भी बनाए जा रहे हैं। इस पर काम शुरू हो चुका है। ऐसे में ताल के बीच रानी की प्रतिमा लग जाने से ये इलाका पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो जाएगा।
एलवीएम में है रानी की पहली प्रतिमा
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की पहली प्रतिमा श्री लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में स्थापित है। इसका निर्माण स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मूर्तिकार मास्टर रुद्रनारायण ने किया था। सन 1940 में इसे स्थापित किया गया था। इसके बाद रानी लक्ष्मीबाई पार्क में रानी की प्रतिमा लगाई गई थी। इसके अलावा मेडिकल कालेज बाईपास तिराहे पर रानी की अष्टधातु की प्रतिमा लगी हुई है। जबकि, रेलवे स्टेशन परिसर में लोहे की प्रतिमा है। इसके अलावा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में भी रानी की प्रतिमा स्थापित है। रेल कारखाने के मुख्य द्वार के सामने भी रानी की बड़ी प्रतिमा स्थापित है। वहीं, ग्वालियर व देश के अन्य कई स्थानों पर भी रानी की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
लक्ष्मी ताल में रानी की प्रतिमा स्थापित करने की डीपीआर तैयार कर ली गई है। इसके लिए बजट की कोई कमी नहीं है। 14वें वित्त आयोग की धनराशि या स्मार्ट सिटी योजना के तहत इसका विकास किया जाएगा। जल्द ही ये तय हो जाएगा। सभी विभागों का इसे लेकर रुख सकारात्मक है। - रामतीर्थ सिंघल, महापौर।