झांसी। वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई व राजा गंगाधर राव की शादी की सालगिरह बीते रोज पहली बार मनाई गई, लेकिन अब रानी की शादी का इतिहास हर साल दोहराया जाएगा। पहले आयोजन को शहर से मिले अपार समर्थन के चलते आयोजन समिति ने यह फैसला लिया है।
रानी लक्ष्मीबाई की जन्म व बलिदान दिवस की तिथियों की तरह ही इतिहास में उनके विवाह की तारीख भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह वही दिन है, जब बिठूर की कन्या मनु 19 मई 1842 को झांसी के राजा गंगाधर राव से परिणय सूत्र में बंध झांसी की रानी लक्ष्मीबाई बनी थी। बावजूद, इतिहास में उनकी वैवाहिक वर्षगांठ के आयोजन का उल्लेख नहीं है। बृहस्पतिवार को पहली बार नगर में यह आयोजन किया गया।
इसकी पहल की महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी ने। लेकिन, देखते ही देखते, पूरा शहर आयोजन का सहगामी बन गया। फिर क्या, अल्प समय व सीमित संसाधनों के बाद भी हो गया भव्य आयोजन। इससे उत्साहित आयोजन कमेटी ने अब हर साल यह आयोजन करने का निर्णय लिया है।
कमेटी के सचिव गजानन खानवलकर ने बताया कि आगामी वर्षों में और भी भव्य आयोजन किया जाएगा। इससे वर्तमान पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम की दीपशिखा के बारे में अधिक से अधिक जानने का मौका मिलेगा। वहीं, वार्ड क्रमांक 56 के पार्षद दिव्य नारायण सोनी कहते हैं कि उनके लिए यह गौरव का विषय है कि रानी का विवाह स्थल गणेश मंदिर उनके वार्ड में स्थित है।
रानी की गौरव गाथा जीवित रखने के लिए इस तरह के आयोजनों का होना जरूरी है। जिला अधिवक्ता संघ के सचिव प्रणय श्रीवास्तव भी इस आयोजन को जारी रखने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि इसमें प्रशासन को भी सहयोग करना चाहिए। व्यापारी नेता सुनील गुप्ता ने कहा कि आगामी वर्षों में आयोजन को व्यापारी वर्ग का पूरा साथ मिलेगा।