झांसी। माहे रमजान में गुनाहों की माफी के साथ ही गुनाहगारों की बख्शिश का जरीया है। इस पाक महीने में सबाव का दर्जा सत्तर गुना अधिक होने के कारण कम तौबा करने पर ही अधिक का सबाव मिलता है। यह बात मुफ़ती साबिर कासमी ने कही है।
उन्होंने कहा कि इस पाक महीने को अल्लाह ने इनाम के तौर पर अता किया है। रमजानुल मुबारक के चांद का दीदार होते ही दोजख के दरवाजों को बंद कर जन्नत के दरवाजों को खोल दिया जाता है। इसी महीने में शैतान को कैद कर दिया जाता है। रमजान में सभी को रोजे रखकर अल्लाह पाक से अपने गुनाहों की तौबा करना चाहिए। अल्लाह अपनी मखलूक से सत्तर मॉ से अधिक प्यार करते हैं। माफी मांगने पर अल्लाह अपनी रहमतों से गुनाहों की माफी देते हैं। रमाजान का महीना इबादतों का महीने कहा जाता है। इस महीने जो कोई भी अपनी बख्शिश को नही करा सका वह कभी भी नही करा सकता है। हर इबादत का दर्जा सत्तर गुना अधिक मिलता है। जिससे की इस महीने में इबादतों के साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद करना चाहिए। कहा रमजान का दूसरा अशरा मगफिरत का अशरा होता है इस अशरे में अल्लाह पाक लोगों के गुनाहों को माफ कर मगफिरत करते हैं। दूसरे अशरे में सभी को अल्लाह पाक से तौबा कर गुनाहों की माफी मांग कर मगफिरत की दुआ करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस वक्त करोना महामारी का दौर चल रहा है। पाकपरवरदिगार से इस महामारी से निजात दिलाने की दुआ कसरत से मांगे। अल्लाह रहीम और करीम है। दुआओं को जरूर कबूल करेंगे।