फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक महीने तक राम मंदिर निर्माण आंदोलन की राजधानी बनी रही थी झांसी

विज्ञापन
ram mandir andolan
विज्ञापन
झांसी। राम मंदिर निर्माण के आंदोलन के दरम्यान झांसी एक महीने तक देश के केंद्र में बना रहा था। यहां माताटीला गेस्ट हाउस में बनाई गई अस्थायी जेल में आंदोलन की अगुवाई कर रहे लालकृष्ण आडवाणी समेत सात बड़े नेताओं को कैद रखा गया था। झांसी में होने वाली हर गतिविधि पर प्रदेश और केंद्र सरकार की सीधी नजर थी। चप्पे-चप्पे पर खुफिया तंत्र जाल बिछाए हुए था। आंदोलन से जुड़े संगठनों के स्थानीय पदाधिकारियों पर भी नजर रखी जा रही थी।
विज्ञापन

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर चलाए गए आंदोलन में झांसी की बड़ी भूमिका रही है। एक वक्त ऐसा भी आया था जब झांसी पूरे देश का केंद्र बिंदु बन गई थी। दरअसल, अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा ढहाए जाने के बाद सात दिसंबर को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। आठ दिसंबर को गिरफ्तारियां हुईं थीं। 9 दिसंबर 1992 को लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार, विष्णु हरी डालमिया, अशोक सिंघल व साध्वी ऋतंभरा को झांसी लाया गया था। इन सभी नेताओं को माताटीला गेस्ट हाउस में बनाई गई अस्थायी जेल में रखा गया था। 10 जनवरी 1993 तक यानी 31 दिन ये सभी नेता यहां रहे थे। इस दरम्यान यहां चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा बैठाया गया था। माताटीला गेस्ट के इर्दगिर्द सुरक्षा बलों की मजबूत घेराबंदी थी। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भाजपा, बजरंग दल के विश्व हिंदू परिषद के स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं पर भी नजर रखी जा रही थी। खुफिया तंत्र झांसी की हर गतिविधि की पल - पल की सूचना सरकार के पास भेज रहा था। इन नेताओं के यहां जमा होने की वजह से तब झांसी मंदिर निर्माण के आंदोलन का बड़ा केंद्र बना रहा था।
चोर रास्तों से पहुंचते थे कारसेवकों तक
झांसी। आंदोलन के दौरान एक समय झांसी में लाखों की संख्या में कारसेवक इकट्ठा हो गए थे। उनके लिए भोजन - पानी का प्रबंध करना बड़ी चुनौती बना हुआ था। लगातार गिरफ्तारियां हो रहीं थीं। संगठन का निर्देश था कि जो कार्यकर्ता कारसेवकों की व्यवस्थाओं में लगे हैं, उन्हें हर हालत में खुद को गिरफ्तार होने से बचाना है। यह जानकारी देते हुए विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन जिला मंत्री श्यामसुंदर श्रीवास्तव ने बताया कि कारसेवकों तक भोजन पहुंचाने के लिए चोर रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ता था। वेश भी बदलना पड़ जाता था। पुलिस का कड़ा पहरा था। देखते ही गिरफ्तारी का आदेश था। तब का संघर्ष अब रंग लाया है और राम का राज्य लौट आया है।
विज्ञापन

खेतों में छुपकर गुजारी थी रात
झांसी। अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को ढांचा ढहने के बाद पुलिस बर्बर हो गई थी। कारसेवक बचने के लिए यहां-वहां भाग रहे थे। जिसे जहां जगह मिल रही थी वो उस दिशा में दौड़ जा रहा था। यह जानकारी देते हुए चंद्रप्रकाश मिश्रा ने बताया कि तब वे विद्यार्थी परिषद में थे और अपनी छात्रों की टोली के साथ अयोध्या कारसेवा करने पहुंच थे। पुलिस से बचने के लिए पूरी एक रात खेत में गुजारी थी। सुबह एक अनजान गांव में पहुंच गए थे। ग्रामीणों ने खाना खिलाया था। लेकिन, बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर झांसी भेज दिया था। चंद्रप्रकाश मिश्रा वर्तमान में समाजवादी पार्टी में हैं। वे कहते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होना हर भारतीय के गौरव की बात है।
कम उम्र में हौसले थे बुलंद
झांसी। राम मंदिर निर्माण के आंदोलन के दौरान उम्र महज बमुश्किल अठारह वर्ष थी, लेकिन हौसले बुलंद थे। यह कहना है किशोर वर्मा का। उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान वे बड़े नेताओं के साथ रहते थे। गिरफ्तारी होने पर नेताओं के साथ उन्हें भी जेल भेजा गया। लेकिन, जेल में वरिष्ठ पूरा ख्याल रखते थे व हौसला बढ़ाते थे। तीन दशक पहले देखा सपना अब सच होने जा रहा है। इसकी एक अलग ही अनुभूति है।
मंदिर बन जाने से देश का भविष्य संवर जाएगा
झांसी। विश्व हिंदू परिषद के नेता पंकज गुप्ता ने बताया कि जय-जय श्रीराम का उद्घोष सुनाई देते ही मन में एक अजीब सा भाव पैदा हो जाता था। यही वजह है कि पढ़ाई छोड़कर मंदिर निर्माण के आंदोलन के सहभागी बन गए। गिरफ्तार हुए और 15 दिन के लिए जेल गए। हालांकि, इसमें परिवार का पूरा साथ मिला। लोगों ने कहा कि जेल जाने से भविष्य खराब हो जाएगा, लेकिन परिजनों ने कहा कि राम मंदिर बन जाने से भारत का भविष्य संवर जाएगा।
पोरवाल की जगह जैन को कराया गिरफ्तार
झांसी। आंदोलन के दौरान उनकी बड़ी भूमिका थी, जो पर्दे के पीछे रहकर काम कर रहे थे। इन्हीं में से एक थे भगवत पोरवाल, जिन पर कारसेवकों के लिए व्यवस्थाएं बनाने की जिम्मेदारी थी। संगठन के निर्देश थे कि ऐसे कार्यकर्ताओं को हर हाल में गिरफ्तारी से बचाना है। पूर्व मंत्री रवींद्र शुक्ल ने बताया कि एक बार भगवत पोरवाल गिरफ्तार हो गए और उन्हें पुलिस लाइन ले जाया गया। जब जानकारी हुई तो वे पुलिस लाइन पहुंच गए। अंधेरे का लाभ उठाकर भगवत को वहां से निकाल लिया गया और उनकी जगह कार्यकर्ता प्रमोद जैन को बैठा दिया गया। भगवत की जगह प्रमोद को जेल जाना पड़ा, लेकिन वे भी खुशी-खुशी इसके लिए राजी हो गए।
28 साल से चल रहा है मुकदमा
झांसी। भाजपा नेता प्रदीप सरावगी मंदिर निर्माण के आंदोलन के दरम्यान ललितपुर में संघ के प्रचारक थे। ढांचा गिरने के बाद सरकार ने संघ पर प्रतिबंध लगा दिया था। बावजूद, मंदिर आंदोलन की धार बनाए रखनी थी। चूंकि, पुलिस लगातार गिरफ्तारियां कर रही थी। ऐसे में 15 साल से कम उम्र के किशोरों के साथ ललितपुर में जुलूस निकाला। पुलिस ने बच्चों की गिरफ्तारी तो नहीं की, परंतु प्रदीप को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। तब दर्ज हुआ मुकदमा आज भी चल रहा है। दिसंबर 2019 में वारंट जारी होने पर जमानत भी करानी पड़ी थी। प्रदीप का कहना है कि पांच अगस्त को मंदिर के भूमि पूजन के साथ आंदोलन से जुड़े हर व्यक्ति का सपना साकार हो जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें