झांसी। रानी लक्ष्मीबाई की नगरी में मुस्लिम भाई व हिंदू बहन के अनमोल रिश्ते की मिसाल देखने को मिल रही है। महानगर में कई मुस्लिम भाई बरसों से हिंदू बहनों से राखी बंधवाकर मिसाल कायम कर रहे हैं। कई सालों से यह अनमोल रिश्ता शहर में भाई-बहन की बड़ी मिसाल बना हुआ है। जिसे हर कोई सराहता है।
मुस्लिम भाई हर रक्षाबंधन पर अपनी हिंदू बहन से राखी बंधवाना नहीं भूलते हैं। साथ ही, रक्षा का वचन देकर भाईचारे को मजबूत करते हैं। यह लोग विधि विधान से इस पावन पर्व को मनाकर भाईचारे का संदेश भी दे रहे हैं। महानगर में इन भाई बहन के रिश्तों की करीब आठ से दस साल पहले शुरूआत हुई थी, जो आज भी बदस्तूर कायम है। अनमोल रिश्ते में बंधने के बाद दोनों एक दूसरे के सुख-दुख को भी मिलकर निभाते हैं। एक फोन पर भाई हर फर्ज निभाने को तैयार रहते हैं तो दूसरी तरफ बहन भी पूरी शिद्दत के साथ रिश्तों को कायम रखे हैं। परिजन भी इनके रिश्ते से खुश नजर आते हैं। अब रक्षाबंधन का पर्व भी आ चुका है। ऐसे में इन भाई बहनों में खासा उत्साह नजर आ रहा है। भाइयों ने गिफ्ट देने के लिए शॉपिंग भी कर ली हैै और बहन भी राखी बांधने का भी पूरा इंतजाम कर चुकी हैं।
नंबर 1
- ससुराल से आती हैं राखी बांधने
गंधीगर का टपरा निवासी मोहसिन खान को पड़ोस में रहने वालीं शिखा वर्मा बचपन से ही राखी बांधती आ रही हैं। शादी के बाद भी रिश्ता कायम है। अब वह ससुराल से राखी बांधने आती हैं। दो दिन पहले वह घर आ चुकी है। उन्होंने बताया कि यह रिश्ता मेरे लिए सबसे बड़ा है।
नंबर 2
- पांच हिंदू बहनें आती हैं राखी बांधने
टंडन रोड निवासी रऊफ खान को भी इलाके में रहने वालीं शिवाजी यादव, पूनम यादव, रश्मि सिंह, मनी त्रिपाठी, रश्मि शुक्ला, राखी भी बचपन से राखी बांध रही हैं। उनके रिश्तों से परिजन भी काफी खुश रहते हैं। उन्होंने बताया कि यह मेरे लिए गर्व की बात है। यह रिश्ता मेरे लिए सबसे खास है।
नंबर 3
दो बहनोें का मिलता स्नेह
रेलवे कॉलोनी निवासी ओसामा को तालपुरा में रहने वालीं निशा व कल्पना हर साल घर आकर राखी बांधती है। वह दोनों बहनों को खुश देखने के लिए गिफ्ट देते हैं। उन्होंने बताया कि हमारा भाई-बहन का रिश्ता जान से भी बढ़कर है। मैं अपने परिवार की तरह दोनों की इज्जत भी करता हूं।
नंबर 4
इस दिन का रहता है बेसब्री से इंतजार
चमनगंज निवासी अजहरउद्दीन रक्षाबंधन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। उनको कोतवाली की ढाल निवासी शिवानी अग्रवाल, आंतिया तालाब निवासी रितिका साहू व अत्री गार्डन ज्योतिका रायकवार कई सालों से राख बांधनी आती हैं। उन्होंने बताया कि बहन के रिश्ते को पाकर मैं बहुत खुश हूं।
हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की डोर मजबूत कर रहीं शबाना, परवीन व सलमा
झांसी। महानगर में मुस्लिम महिलाएं भी हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की डोर मजबूत कर रही हैं। वह हिंदू भाइयों को राखी बांध रही हैं। नरसिंह राव टौरिया निवासी शेखर सोनी भी इस अनूठे रिश्ते की मिसाल हैं। शेखर सोनी की सराफा बाजार में सोने-चांदी की दुकान हैै। ग्राहकों का आना-जाना लगा रहता है। करीब 15 साल पहले उनकी दुकान पर कुरैश नगर निवासी सलमा, मुकरयाना निवासी परवीन और शबाना सामान खरीदने आती थीं। लेकिन, ग्राहक के साथ ही उनके रिश्ते बहन जैसे हो गए। इसके बाद देखते ही देखते तीनों ने शेखर को अपना भाई माना और अब तीनों 15 साल से ही राखी बहन होने का फर्ज निभा रही हैं। रक्षाबंधन से पहले शेखर की पत्नी संगीता सभी के लिए गिफ्ट लाती हैं। यह रिश्ता भी सराफा बाजार में अनूठी मिसाल है। रक्षाबंधन के साथ ही शेखर अपनी पत्नी के साथ ईद अन्य त्योहारों पर तीनों बहनों के घर जाते हैं। उनका कहना है कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है। बहनें तो किस्मत वालों को मिलती हैं। इसी तरह, छनियापुरा में रहने वालीं नेहा खान बड़ागांव गेट रहने वाले बृजेंद्र रिछारिया को राखी बांधती हैं। यह रिश्ता करीब तेरह सालों से चला आ रहा है। नेहा खान बताती हैं कि उनके पति अब्दुल समद के बृजेंद्र दोस्त थे। घर आना-जाना था, इसी दौरान उन्होंने भाई माना था। हर साल वह रक्षाबंधन का बेसब्री से इंतजार करती हैं।