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सात्विक प्रेम की खातिर अग्निकुंड में कूदकर किया था राजकुमारी केसर दे ने आत्मबलिदान

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झांसी। गढ़कुंडार के खंगार राजघराने की राजकुमारी जहां ललित कलाओं में पारंगत थी, वहीं इनके रूप सौंदर्य के चर्चे भी दूर-दूर तक थे। मालवा राजघराने के राजकुमार से इनके विवाह तय किया गया था, राजकुमारी और राजकुमार दोनों ही एक दूसरे को मन ही मन प्यार करने लगे थे, पर अचानक राजकुमारी केसर दे की डोली उठने से पहले ही वक्त ने ऐसी करवट बदली कि जो राजकुमारी अपने सपनों के राजकुमार के साथ डोली में जाने वाली थी, उसने अपने सात्विक प्रेम के लिए अग्निकुंड में कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। आज भी गढ़कुंडार के किले के पीछे स्थित अग्निकुंड के पास केशर दे का जौहर स्तंभ स्थित है और खंगार वंश के लोग उन्हें अपनी कुल देवी के रूप में पूजते हैं।
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इस संबंध में खंगार वंश से ताल्लुक रखने वाले जय हिंद सिंह परिहार बताते हैं कि राजवंश के इतिहास में राजकुमारी केसर दे की पवित्र बलिदान गाथा अंकित है। गढ़कुंडार के खंगार वंश के राजा मानसिंह की राजकुमारी केशर दे की सुंदरता के चर्चे बुंदेलखंड के जमींदार और जागीरदारों के माध्यम से मोहम्मद तुगलक तक पहुंच चुके थे, कुछ चाटुकार जागीरदारों में मोहम्मद तुगलक को सलाह दी कि वे केशर दे को अपनी बेगम बना लें, उधर गढ़ कुंडार के राजा मान सिंह मालवा राजघराने में अपनी बेटी का विवाह करने का मन बना चुके थे तथा इस घराने के राजकुमार का गढ़कुंडार आना जाना भी लगा रहता था, राजकुमारी मन ही मन उनसे प्रेम करने लगी थीं। इसी दौरान एक दिन अचानक कुछ मुुगल सैनिक गढ़कुंडार पहुंचे तथा उन्होंने राजा मान सिंह को मोहम्मद तुगलक की पाती थमा दी, इसमें राजकुमारी केशर दे को बेगम बनाने का प्रस्ताव था, लिखा था, अगर मान सिंह इस प्रस्ताव को नहीं मानते हैं तो मुगल सेना से युद्ध के लिए तैयार रहें। पाती पढ़ते ही खंगार राजा मान सिंह आग बबूुला हो गए, उन्होंने पाती लेकर आए सैनिकों को संदेश दिया कि वह मोहम्मद तुगलक से कह दें कि मानसिंह युद्ध के लिए तैयार हैं। मुकेश यादव बताते हैं कि मोहम्मद तुगलक ने गढ़कुंडार का किला चारों ओर से घेर लिया। छापामार युद्ध चलता रहा। कई दिनों तक किले में कैद रहने के बाद अंतत: मानसिंह को अपनी सेना के साथ मैदान में आना पड़ा।
तुगलक की सेना के सामने खंगार राज्य की सेना कमजोर पड़ गई। राजा मान सिंह अपने पुत्र वरदायी और अन्य महारथियों के साथ युद्ध में शहीद हो गए। गुप्तचर ने जनानखाने में आकर सूचना दी कि महाराजा मान सिंह और राजकुमार वरदायी युद्ध में शहीद हो गए हैं तथा मोहम्मद तुगलक राजकुमारी के सर दे को लेने के लिए किले की ओर आ रहा है, राजकुमारी ने हुंकार भरते हुए कहा कि वह अगर मालवा घराने के राजकुमार की नहीं हो सकीं तो उन्हें कोई दूसरा छू भी नहीं सकता है। किले के पिछले मैदान में बने कुंड में अग्नि प्रज्ज्वलित की गई तथा सबसे पहले केसर दे ने और इसके बाद बारी-बारी से सात राजकुमारियों ने अग्निकुंड में कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मोहम्मद तुगलक किले के अंदर पहुंचा तब तक राजकुमारी केसर दे आग में समा चुकी थीं। सात्विक प्रेम के लिए दिए गए केसर दे के आत्मबलिदान की गाथा जब भी बुंदेलखंड में सुनाई जाती है लोगों की आंखें नम हो जाती हैं।
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