अब ‘केटीना’ संग दर्शकों को गुदगुदाएंगे राज शांडिल्य
झांसी। झांसी से निकलकर मुंबई के ग्लैमर वर्ल्ड में अपनी जगह बना लेने वाले राज शांडिल्य ‘ड्रीमगर्ल’ की सफलता दुहराने को बेकरार हैं। इस बार वह बालाजी फिल्म्स जैसे बैनर के तले बनी फिल्म ‘केटीना’ के साथ दर्शकों को गुदगुदाने आ रहे हैं। इस फिल्म के अगले वर्ष रिलीज होने की उम्मीद है। इसके साथ ही राज सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस के अलावा दूसरे बड़े प्रोजेक्टों में काम कर रहे हैं।
बॉलीवुड में नए निर्देशन की कतार में तेजी से अपना नाम बना रहे राज शांडिल्य बुधवार को अमर उजाला कार्यालय पहुंचे। यहां राज ने अपने आगे के फिल्मी कैरियर के बारे में खुलकर बात की। बात छोटे शहर से निकलने के साथ शुरू हुई। राज ने दो टूक कहा, दुआएं सबकी कुबूल होती है लोग इंतजार नहीं करते।
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए राज बताते हैं मुंबई में रहने का ठिकाना नहीं था। करीब पूरे दो साल तक नियमित भोपाल एक्सप्रेस से मुंबई जाता था। मुंबई स्टेशन के स्ट्रांग रूम में समान रखकर लोगों से मिलता था। कुछ लोगों ने मौका दिया। शुरूआत दूसरे के नाम से लिखने के साथ हुई। उसके बाद कपिल शर्मा का शो मिला और गाड़ी निकल पड़ी।
मुंबई में लेखक को पहचान मिलने के सवाल पर राज संजीदा हो उठते हैं। वे कहते हैं अब दौर बदल चुका है। स्क्रिप्ट लिखने वालों की अपनी पहचान है। बड़े-बड़े बैनर मुंहमांगा पैसा दे रहे हैं लेकिन यह सफलता सिर्फ काबलियत पर ही निर्भर करती है। राज शांडिल्य कॉमेडी राइटिंग को काफी चुनौतीपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है किसी को रुलना आसान है लेकिन उसे हंसाना बहुत कठिन है।
अपनी फिल्मों में छोटे शहरों के किस्सों को बयां करने के पीछे उनका कहना है रहा कि कहानियां छोटे शहरों में ही होती हैं। कहानियों का कच्चा माल भी रोजाना की जिंदगी से ही कहीं मिल जाता है। इसी दौरान झांसी के कलाकारों की उनसे नाराजगी का सवाल भी आया लेकिन बिना असहज हुए राज ने कहा मुंबई सबको मौका देती है। बशर्ते लोग वहां पहुंचकर खुद को साबित करें।
अपनी नई फिल्म पर चर्चा करते हुए राज बताते हैं बालाजी बैनर्स के तले बन रही केटीना एक हल्की-फुल्की मिजाज की फिल्म है। फिल्म एक ऐसी युवती के इर्द-गिर्द घुमती है, जिसकी शादी नहंी हो रही। इन परिस्थितियों के बीच किस तरह के टोटके आजमाए जाते हैं, उनको फिल्म में अपने अंदाज में पेश करने की कोशिश की है।