रेलवे वर्कशाप में ब्याजखोरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। इनमें तीन सौ से अधिक कर्मचारी कर्ज में डूबे हुए हैं। सूदखोरों इन कर्मचारियों को दस से बीस प्रतिशत महीने ब्याज दर से पैसा दे रखा है। इनमें ज्यादातर अवैध रूप से सूदखोरी का धंधा कर रहे हैं। इनके चंगुल में फंसे कुछ लोग तो ऐसे हैं, जिन पर इस कदर ब्याज चढ़ गया है कि अब उसे चुकाना उनके लिए मुश्किल है। जिले में सिर्फ 56 लाइसेंसी साहूकार हैं, पर अवैध रूप से यह धंधा करने वालों की संख्या सैकड़ों में है।
मूलरूप से तालबेहट निवासी रेलवे कर्मचारी मोहन लाल ने प्रेमनगर में रहने वाले एक सूदखोर से बीस हजार रुपये दस फीसदी ब्याज पर लिए थे। अब कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं। रेलवे वर्कशाप में पांच हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें तीन सौ से अधिक कर्मचारी कर्ज में डूबे हैं। इनमें अधिकांश ऐसे कर्मचारी हैं, जो जुआ, सट्टा खेलने और शराब पीने के आदी हैं। सूदखोरों इन कर्मचारियों को दस से बीस प्रतिशत ब्याज पर पैसा दे रखा है, इस कारण कर्मचारियों को ब्याज भरना भी मुश्किल रहता है। सभी सूदखोर प्रभावशाली है और वे कर्मचारियों को खौफ में रखते हैं। यहां तक कि सूदखोरों ने कर्मचारियों के एटीएम तक अपने पास रख लिए हैं। खाते में वेतन आते ही वे कर्मचारी को बुलाकर ब्याज निकाल लेते हैं। इस संबंध में एक गोपनीय पत्र पीएम, सीएम, एसएसपी और संबंधित रेल अफसरों पत्र लिखा गया है, जिसमें सूदखोरों और पीड़ितों के नाम उजागर किए गए हैं।
स्टेशन पर भी सक्रिय हैं एक दर्जन ब्याजखोर
रेलवे के सैकड़ों रिटायर्ड व वर्किंग कर्मचारी सूदखोरों के चंगुल में फंसे हुए हैं। चूंकि, अधिकांश रेलवे कर्मचारियों के खाते स्टेशन पर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में है। इस कारण सूदखोर बैंक के बाहर व पे एंड यूज शौचालय के बगल में पट्टी पर अपना डेरा जमाए रहते हैं। जैसे ही बैंक से कोई कर्जा लेने वाला कर्मी रुपये निकाल कर निकलता है। वह उसे घेरकर अपना ब्याज वसूलने में लग जाते है। इतना ही नहीं इनका जाल छोटे स्टेशनों पर तैनात कर्मचारियों तक भी फैला है। ब्याजखोर अपने सूत्रों से पता कर लेते हैं कि किस तारीख को लाइन पर वेतन बंटने जा रहा है। वह उसी दिन संबंधित स्टेशन पर पहुंचकर कर्मचारी से ब्याज वसूल लाते हैं। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है।
जिले में सिर्फ 56 लाइसेंसी साहूकार
जिले 56 लाइसेंसी साहूकार हैं। इसमें झांसी तहसील में 45, मोंठ में दो, गरौठा में एक और मऊरानीपुर में छह लाइसेंसी साहूकार हैं। इस मामले में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) विजय बहादुर सिंह ने बताया कि अगर कोई सूदखोर किसी को परेशान कर रहा है तो उसके खिलाफ थाने में साहूकारी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है। उनके पास भी शिकायत की जा सकती है।
साहूकारी का लाइसेंस लेने के लिए नियम
- एसएसपी और एसडीएम की रिपोर्ट पर ही मिलता है लाइसेंस
- हर साल कराना पड़ता है लाइसेंस का नवीनीकरण
- लाइसेंस और नवीनीकरण का शुल्क 15 रुपये
- लाइसेंस लेने के लिए बैंक में पैसा होना जरूरी
- बैंक की तरह सालाना ब्याजदर पर ही लिया जा सकता है ब्याज
- बिना लाइसेंस छह माह की सजा या पांच हजार रुपये जुर्माना।