झांसी। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों ने मंगलवार को रेलवे स्टेशन और कोच वॉशिंग यार्ड में ठोस व तरल कचरे तथा निस्तारण के तौर तरीकों की जांच की तो हालत खराब मिले। रिपोर्ट बोर्ड मुख्यालय भेजी जा रही है।
एनजीटी व शासन के आदेशों पर मंगलवार को क्षेत्रीय प्रदूषण विभाग की टीम ने रेलवे स्टेशन व कोच वाशिंग यार्ड का निरीक्षण किया। सहायक अभियंता विजय कुमार दुबे के अनुसार रेलवे स्टेशन पर वॉशिंग यार्ड, सुलभ शौचालय, प्रतीक्षालय, खानपान स्टॉल व भोजनालय, रेल लाइनों की सफाई व प्लेटफार्म की धुलाई से ढाई से तीन हजार किलोलीटर गंदा पानी बहाता है। यह पानी रेलवे की नालियों से होकर नगर निगम के नाले में गिरता है। गंदा पानी बिना शुद्धीकरण के ही नाले में बहाया जा रहा है। कोच वाशिंग यार्ड में ऑयल तथा ग्रीस को अलग करने के लिए ऑयल सेपरेटर नहीं लगाया गया है। गंदे पानी के सैंपल भरे गए। पीने के पानी के भी नमूने प्रयोगशाला में जांच के लिए भरे गए।
साथ ही पता लगा कि स्टेशन व परिसर से प्रतिदिन दो हजार किलोग्राम ठोस कचरे को एकत्र करने के लिए 220 डस्टबिन लगे हैं। इस कूड़े को पंचवटी पर स्थित नगर निगम के डंपिंग यार्ड में भेजा जाता है। स्टेशन अधिकारियों ने बताया कि कूड़ा फेंकने के लिए उनका नगर निगम से अनुबंध है। मगर, वह अनुबंध की प्रति उपलब्ध नहीं करा सके। स्टेशन पर पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 एवं जल प्रदूषण (निवारण) तथा नियंत्रण अधिनियम 1974 यथा संशोधित 1978 तथा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016 का पूर्ण अनुपालन नहीं किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान स्टेशन डायरेक्टर अनुपम सक्सेना, सीनियर सेक्शन इंजीनियर एलके तिग्गा, विक्रम सिंह, सहायक अभिषेक श्रीवास्तव मौजूद थे।
वहीं, इस संबंध में रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि पानी को शुद्ध करने के लिए डीजल शेड में वाटर ट्रीटमेंट लगा है। ट्रीटमेंट प्लांट से गुजारने के बाद ही अशुद्ध पानी को नाले में डाला जा रहा है।