झांसी। कोहरे के कारण ट्रेनों की लेटलतीफी ने स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ बढ़ा दी है। यात्री प्रतीक्षालय ठसाठस हैं। ठंड में लोगों को रात खुले में बितानी पड़ रही है। आलम यह है कि शौचालय उपयोग के लिए लाइन लगानी पड़ रही है। स्टेशन पर खाने-पीने तक की परेशानी हो रही है।
झांसी रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख स्टेशनों में शुमार है। यात्रियों को चारों दिशाओं की ओर यहां से ट्रेनें सुगमता से मिल जाती हैं। प्रतिदिन झांसी से बीना, भोपाल और इटारसी की ओर 67, ग्वालियर, आगरा व दिल्ली की ओर 67, कानपुर की तरफ 28 व इलाहाबाद की तरफ 12 गाड़ियां उपलब्ध हैं। औसतन झांसी से प्रतिदिन जनरल टिकट पर 18 हजार व आरक्षित टिकट पर पांच यात्री सफर करते हैं। पूरे बुंदेलखंड से लोग झांसी ट्रेन पकड़ने आते हैं। इतना ही नहीं प्रतिदिन दो से तीन हजार यात्री प्रतिदिन ट्रेन बदलने के लिए यहां उतरते हैं।
दरअसल, आम दिनों में ट्रेनों का संचालन सामान्य बना रहने से भीड़ स्टेशन पर दिखाई नहीं पड़ती है। इन दिनों कोहरे ने यात्रियों के सफर को मुसीबत भरा बना दिया है। अधिकांश ट्रेनें पांच से बीस घंटे तक की देरी से चल रही हैं। यात्रियों को घंटों स्टेशन पर गुजारने पड़ रहे हैं। रात में ठंड से बचने के लिए रिटायरिंग रूम, वेटिंग रूम, पैसेंजर हॉल, बुकिंग हॉल यात्रियों से भर जाते हैं। इन स्थानों की क्षमता कम होने से सैकड़ों यात्रियों को प्लेटफार्म व रेलवे परिसर में खुले में बैठकर गुजारना पड़ रहा है। स्टेशन पर अलाव का इंतजाम न होने से यात्रियों के लिए पल-पल गुजारना भारी रहता है। शौचालय तक में लाइन लग रही है। यात्री खाने को लेकर भी परेशान हो रहे हैं।
यात्री पूछताछ नंबर 139 पर ट्रेन की पोजीशन पता करके ही यात्री घर से चलें। अन्यथा स्टेशन पहुंचने पर उनको इंतजार करना होगा। कोहरे के कारण ट्रेनों का संचालन प्रभावित है।
- मनोज कुमार सिंह, पीआरओ झांसी रेल मंडल
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यहां से वहां भटक रहा हूं
कर्नाटका एक्सप्रेस से बंगलूरू से झांसी आया था। झांसी से ग्वालियर-बरौनी एक्सप्रेस पकड़कर समस्तीपुर जाना है। ट्रेन 15 घंटे लेट चल रही है। इस कारण बच्चों के साथ इधर से उधर भटक रहा हूं। ट्रेन की सही पोजीशन की जानकारी भी कोई नहीं दे रहा है।
- राजपाल वर्मा, समस्तीपुर
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नहीं मिल रहा मन का खाना
मध्यप्रदेश संपर्क क्रांति से मुझे जबलपुर जाना है। ट्रेन सात घंटे लेट है। पूरे स्टेशन पर कहीं भी मन का खाना नहीं मिल रहा है। सभी जगह ठंडी खाद्य सामग्री रखी है। मजबूरन, बिस्किट खाकर समय गुजार रहा हूं।
- मनोज तिवारी, जबलपुर