झांसी। दिव्यागों को अब यूनिक कार्ड बनवाने के लिए डीआरएम कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। रेल प्रशासन अब जल्द ही इस व्यवस्था को ऑनलाइन करने पर विचार कर रहा है। दूसरे जोनों में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है।
अस्थि विकृति से दिव्यांग, मूक तथा बधिर, मानसिक रूप से विकृत, नेत्रहीन व्यक्तियों, रोगियों व उनके केयर टेकर व एक व्यक्ति को रेलवे किराए में पचास प्रतिशत की रियायत देता है। इसके लिए पचास प्रतिशत या इससे अधिक विकलांगता होना आवश्यक है। जिला अस्पताल से जारी होने वाले प्रमाण पत्रों के आधार पर 2015 तक लाभार्थियों को आरक्षित व अनारक्षित टिकट में रियायत दी जाती थी। दिसंबर 2015 से रेलवे ने लाभार्थियों को दिव्यांग पहचान पत्र (यूनिक आईडी) जारी करना शुरू कर दिया था। इस कार्ड में दर्ज यूनिक आईडी नंबर के आधार पर ही टिकट बन रहा है। रेलवे अभी तक नौ हजार से अधिक कार्ड जारी कर चुका है। साल 2020 में 1282 पात्रों ने कार्ड बनवाए। अभी कार्ड बनवाने के लिए लाभार्थियों को डीआरएम कार्यालय आकर आवेदन देना पड़ता और कार्ड बनने पर उसे लेने भी आना पड़ता है। मगर, रेल प्रशासन अब इस प्रक्रिया को ऑनलाइन करने पर विचार कर रहा है, ताकि दिव्यांगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।