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रेलवे वैगन मरम्मत कारखाने में जलसंकट

Tue, 30 Jan 2018 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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water problem, jhansi news - फोटो : demo
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रेलवे वैगन मरम्मत कारखाने में कर्मचारियों को पीने के पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। फिल्टर हाउस में जल शोधन प्रक्रिया धीमी होने के कारण कारखाने को एक घंटे की पानी की आपूर्ति मिल पा रही है। कारखाने में पांच हजार से अधिक कर्मचारी तीन शिफ्टों में काम करते हैं।
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वैगन मरम्मत कारखाने को पुलिया नंबर नौ अंडरब्रिज के पास बने फिल्टर हाउस से पानी की आपूर्ति मिलती है। फिल्टर हाउस के बैड (पानी छानने के उपकरण) 100 साल से ज्यादा पुराने हो गए है। इससे जल शोधन का काम बेहद धीमा हो गया है। चूंकि, फिल्टर हाउस से रेलवे कॉलोनी, सुपरवाइजर ट्रेनिंग सेंटर, यूनियन ऑफिस, कैंटीन, रेलवे स्टेशन को भी पानी की आपूर्ति देनी पड़ती है। इस कारण कारखाने को सुबह एक घंटे ही पानी की आपूर्ति मिल पा रही है। एक घंटे की सप्लाई में कारखाने की टंकी का आधा भर पाना भी मुश्किल होता है। यह पानी पांच से छह घंटे में ही खत्म हो जाता है। पानी खत्म होने पर कर्मचारियों में शोरगुल शुरू हो जाता है। मजबूरन, वरिष्ठ खंड अभियंता (कार्य) को फिल्टर हाउस से जुड़े अधिकारियों से पानी देने के लिए बार-बार आग्रह करना पड़ता है। इसके बाद भी पानी मिल जाए, यह भी मुमकिन नहीं है।

चल रहे प्रयास
‘पानी की समस्या को दूर करने के लिए प्रयास चल रहे हैं। कारखाने में बने एक पुराने कुएं को दोबारा साफ कराया जा रहा है। एक बंद पड़ी बोरिंग को भी चालू कराने की तैयारी है। मैंने इस समस्या को लेकर मंडल रेल प्रबंधक से भी बात की है।’
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आरडी मौर्या, मुख्य कारखाना प्रबंधक।

हो चुका ठेका
पुराने फिल्टर हाउस के बगल में ही नया जल शोधन केंद्र बनना है। इस काम के लिए चार करोड़ रुपये स्वीकृत और टेंडर भी दो महीने पहले हो चुका है। मगर, अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है।

बगीचे को कैसे मिले पानी?
मुख्य कारखाना प्रबंधक के आदेश पर कारखाने में अलग-अलग जगह दस बगीचे बना दिया गए हैं। मगर, वरिष्ठ खंड अभियंता कार्यालय के लिए पानी देना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। इससे बगीचे हरे भरे होने की जगह शुरूआत में ही उजड़ने लगे हैं।

ये भी जानिए  
 उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में 25 नवंबर 1895 को स्थापित इस रेलवे वैगन मरम्मत कारखाने में वैगन दो मरम्मत के लिए वेल्डिंग, पेंटिंग, एसएसई यार्ड, एसएसई रीहेब, बीडब्लूआर, पावर हाउस, मिड नाइट, धातुशाला, व्हील, मशीन, आर बी फर्स्ट, सेकेंड, थर्ड, एयर ब्रेक लैब, टूल रूम समेत बाइस शॉप हैं। वर्तमान में इन शापों में पांच हजार से कर्मचारी कार्यरत हैं। मरम्मत के लिए देश भर से यहां वैगन भेजे जाते हैं। वित्तीय वर्ष में सात सौ से अधिक प्रतिमाह वैगनों की मरम्मत का लक्ष्य दिया गया है। दो साल पहले 110 करोड़ की लागत से वर्कशाप आधुनिकीकरण का काम भी पूरा हो चुका है।

कर्मचारियों की कमी
रेलवे कारखाना, उप मुख्य सामग्री प्रबंधक कार्यालय, सुपरवाइजर ट्रेनिंग सेंटर, यूनियन ऑफिस, कैंटीन आदि की देखरेख का काम वरिष्ठ खंड अभियंता (कार्य) कार्यालय के पास है। इस कार्यालय में पहले 40 कर्मचारी थे। अब सिर्फ पांच कर्मचारी बचे हैं। इनमें दो खलासी, एक मिस्त्री, एक सफाई वाला और एक चपरासी शामिल है। फिटर न होने के कारण पाइप लाइन लीकेज या पानी की दूसरी समस्या का काम खलासी से ही कराना पड़ता है। खलासी भी पानी लीकेज को पट्टी बांध-बांधकर ठीक कर रहा है।
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