जिले के कई नर्सिंगहोमों में मंगलवार से इमरजेंसी सेवा शुरू हो गई। गंभीर रोगियों ने अस्पताल पहुंचकर अपना उपचार कराया। नर्सिंगहोमों में सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन का भी ध्यान रखा गया। अब नर्सिंगहोम एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि डायग्नोस्टिक सेंटर खोलने की भी अनुमति दी जाए, क्योंकि इमरजेंसी में कई मरीजों का जांच के अनुसार इलाज किया जाता है।
कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन की घोषणा के बाद निजी अस्पतालों में ओपीडी संचालन, गैर जरूरी ऑपरेशन समेत तमाम पाबंदियां लगा दी गई थीं। अब लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू होने के बाद प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य विभाग की अनुमति से नर्सिंगहोमों में इमरजेंसी सेवा शुरू करने की छूट दे दी है।
इसी क्रम में मंगलवार से झांसी के ज्यादातर नर्सिंगहोमों में इमरजेंसी सेवा शुरू हो गई। कई गंभीर मरीजों ने अस्पताल पहुंचकर अपना उपचार कराया। अस्पतालों में सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन किया गया। हालांकि, परिवहन सेवा अभी भी बंद होने की वजह से दूरदराज के मरीज अस्पताल नहीं पहुंचे।
जिन मरीजों के पास निजी वाहन की सुविधा थी, वो ही इमरजेंसी में नर्सिंगहोम दिखाने पहुंचे। नर्सिंगहोम एसोसिएशन के सचिव निलय जैन ने बताया कि प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने 19 मई से नर्सिंगहोमों में आकस्मिक सेवाएं शुरू करने की अनुमति दे दी है। इसी क्रम में झांसी के 70 फीसदी नर्सिंगहोम खुल गए। 30 फीसदी अस्पताल नहीं खुलने के पीछे का कारण स्टाफ का न होना रहा।
लॉकडाउन में स्टाफ अपने घर चला गया है। जैसे-जैसे कर्मचारी आते जाएंगे, वैसे-वैसे निजी अस्पताल भी खुल जाएंगे। उन्होंने शासन से मांग की कि डायग्नोस्टिक सेंटर खोलने की भी अनुमति दी जाए। गंभीर स्थिति में आने वाले कई मरीजों का सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड आदि जांच कराने के बाद ही उपचार किया जाता है। सेंटर बंद होने से मरीज का सही उपचार नहीं हो पाएगा।