झांसी। यदि कुत्ते ने बाजू से ऊपर काट लिया है तो तत्काल एंटी रेबीज सीरम (एआरएस) लगाएं। समय रहते एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) जरूर लगवा लें। 10 दिन बाद एआरवी काम नहीं करती है। रेबीज वायरस दिमाग में पहुंचने से हाइड्रोफोबिया हो जाता है। इसके बाद जीवन बचाना संभव नहीं होता। वहीं, जिला अस्पताल में हर माह कुत्ता काटने के औसतन 250 लोग वैक्सीन लगवाने के लिए आते हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. डीएस गुप्ता ने बताया कि कुत्ता, बंदर, भेड़िया आदि के काटने से रेबीज वायरस घाव के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। जब संक्रमित जानवर काटते हैं तो उसकी लार में मौजूद वायरस त्वचा, मांसपेशियों व नसों में पहुंच जाता है। इसके बाद रक्त प्रवाह के माध्यम से यह वायरस रीढ़ की हड्डी और ब्रेन तक पहुंचता है तो हाइड्रोफोबिया हो जाता है। इसमें गले की मांसपेशियों में एठन होती है, जिससे निगलने में दिक्कत होती है। मुंह से लार आती है और खास बात यह कि पानी देखने से डर लगता है।
उन्होंने बताया कि यदि बाजू, कंधा अथवा गर्दन के पास काटा है तो उपचार में कतई देरी न करें। इन अंगों से रेबीज वायरस तेजी से दिमाग तक पहुंच जाता है। इसलिए गहरे घाव को तुरंत साफ पानी से घोएं। अस्पताल पहुंच कर एंटी रेबीज सीरम लगवाएं। यही नहीं, 24 से 48 घंटे में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाएं। वह बताते हैं कि पैर में बड़ा घाव हो गया है, तब भी उपचार की इसी प्रक्रिया को अपनाना होगा।
कुत्ते के काटने के बाद ये करें
सबसे पहले साफ पानी की धार में घाव को धोएं। घाव को सुखाने के बाद पट्टी भूलकर भी न बांधें। गहरा घाव है तो एंटी रेबीज सीरम को लगवाएं। 24 घंटे में टिटनेस का टीका भी जरूर करवाएं। प्रयास करें कि 48 घंटे में एंटी रेबीज वैक्सीन लग जाए।