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रेलवे में निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन

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नार्थ सेंट्रल रेलवे मैन्स यूनियन के कर्मचारियों नें निजीकरण एवं निगमीकरण के विरोध में बुधवार को
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रेलवे में निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन
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झांसी। आल इंडिया रेलवे फेडरेशन के आह्वान पर बुधवार को नॉर्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन के सदस्यों ने रेलवे में हो रहे अंधाधुंध निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। सदस्यों ने यूनियन के मंडल कार्यालय से लेकर डीआरएम कार्यालय तक जुलूस निकाला। साथ ही रेल मंत्री को संबोधित आठ सूत्रीय ज्ञापन मंडल रेल प्रबंधक को सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा में मंडल सचिव आरएन यादव ने कहा कि रेल हमारी मां है और हम किसी भी कीमत पर अपनी मां को बिकने नहीं देंगे। जिस प्रकार रेलवे में अंधाधुंध रूप से निजीकरण किया जा रहा है वह न सिर्फ रेल के लिए बल्कि उपभोक्ताओं के भी हित में नहीं है। निजी कंपनियों में मुनाफाखोरी की प्रवृत्ति होती है उसे सिर्फ और सिर्फ अपने मुनाफा कमाने से मतलब होता है। निजी कंपनियां रेल कर्मचारियों की पीढ़ियों की मेहनत से खड़े किए संसाधनों का दोहन कर मुनाफा कमाएंगी।
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मंडल अध्यक्ष एचएस चौहान ने कहा कि रेलवे में समस्या कर्मचारियों की वजह से नहीं, बल्कि अफसरशाही की वजह से है। यदि रेल चलाना अफसरों के बस में नहीं रह गया तो इसका संचालन हम कर्मचारियों को सौंप दें। कर्मचारी हर तरह से रेल चलाने में समक्ष और समर्थ हैं। ज्ञापन में भारतीय रेल रोलिंग स्टाफ कंपनी बनाने के प्रस्ताव को निरस्त करने, तेजस और अन्य 150 गाड़ियों के निजीकरण के प्रस्ताव को रद्द करने, पुरानी पेंशन बहाल करने, निजीकरण के लिए बनाई गई कमेटियों को भंग करने, रेलवे की प्रिंटिंग प्रेसों को दोबारा चालू करने आदि मांगे शामिल थीं। प्रदर्शन के दौरान वीएस कंसाना, आरके सोनी, अजय यादच, आरएन उपाध्याय, ऊषा सिंह, मंजू अस्थाना, कल्पना गुबरेले मौजूद रहीं। संचालन पवन झारखड़िया ने किया।
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