झांसी। प्रकृति की मार से कराह रहे किसानों को मटर व अलसी की फसल खुशहाल बना सकती है। कृषि विभाग इन फसलों को बोने की सलाह किसानों को देने की योजना बना रहा है।
बुंदेलखंड का किसान सर्वाधिक गेहूं बोना पसंद करता है। शासन से आए बुआई के लक्ष्य में भी गेहूं को प्रमुखता दी गई है। झांसी मंडल में पिछले वर्ष के मुकाबले करीब पचास हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल गेहूं की फसल का बढ़ाया गया है। इसके बावजूद कृषि विभाग के अधिकारी सिंचाई की समस्या और मौसम की मार को लेकर आशंकित हैं। विभाग किसानों को अब मटर, अलसी व चना की अधिक से अधिक बुवाई करने की सलाह देने की योजना बना रहा है।
मटर व अलसी की फसलें कम पानी में तैयार हो जाती हैं। यदि इन फसलों को एक बार भी अच्छा पानी मिल जाए तो यह जमीन की नमी के बल पर तैयार हो जाती हैं। यही स्थिति चना की फसल के साथ भी है। एक अच्छी सिंचाई चना की फसल को तैयार कर सकती है। लेकिन, चना के साथ खतरा अतिवृष्टि को लेकर है। पिछले दो वर्षों से अतिवृष्टि होने के कारण चना की फसल खराब हो गई थी। ऐसे में चना को वरदान मानना संभव नहीं हो पा रहा है, जबकि मटर व अलसी कम पानी में भी तैयार होने में सक्षम हैं।
बॉक्स
-----
गेहूं को चाहिए सर्वाधिक पानी
बुंदेलखंड की पारंपरिक फसल गेहूं के लिए पानी की अधिक आवश्यकता होती है। गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए कम से कम तीन बार सिंचाई करना बेहद जरूरी है, इससे कम सिंचाई में गेहूं सही ढंग से तैयार नहीं हो पाता है। इस वर्ष औसत से कम बारिश होने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए नहरों पर ही निर्भर रहना पड़ेगा। लेकिन, नहरों का फरवरी तक संचालन होना संभव नहीं दिख रहा है। अतिवृष्टि से फसलें बर्बाद होने के बावजूद गेहूं खरीद में झांसी मंडल पूरे प्रदेश में अव्वल रहा था।
वर्जन
------
गेहूं सर्वाधिक उपयोगी अनाज है और बुंदेलखंड की प्रमुख फसल है। गेहूं को किसी भी दशा में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। जिन स्थानों पर पानी की समस्या है, वहां के किसान मटर, अलसी और चना बो कर लाभ कमा सकते हैं।
बीआर मौर्य
जिला कृषि अधिकारी, झांसी।