झांसी। ड्राइवर ने एक करोड़ रुपये की फिरौती वसूलने के लिए डा. अभय गुप्ता के पुत्र आरुष गुप्ता का अपहरण किया था। उसके दोस्त ने ही अपहरणकर्ता बनकर डा. रुबी से अपहरण की बात कहते हुए रुपयों की व्यवस्था करने की बात कही थी।
यह खुलासा मंगलवार की सुबह पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता के दौरान एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने किया। उन्होंने बताया कि राघवेंद्र तिवारी निवासी करगुवां सेंधरी टीकमगढ़ करीब दो दशक से झांसी में रहकर गाड़ी चलाने का काम कर रहा था। उसने करीब डेढ़ माह पूर्व डा. अभय गुप्ता की गाड़ी चलाना शुरू किया था। उसकी ड्यूटी आरुष गुप्ता को स्कूल से लाने - लेजाने की थी। डाक्टर परिवार की समृद्धि को देखकर उसने अपहरण का तानाबाना बुना। इस योजना में अपने नये दोस्त अजय परिहार निवासी शिवाजी नगर को शामिल किया। योजना के अनुसार एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी जानी थी। फिरौती की रकम मिलने पर अजय को 25 फीसदी रकम दी जानी थी। तय योजना के मुताबिक राघवेंद्र बच्चे को प्रतिदिन की भांति सदर बाजार थानांतर्गत स्कूल ले गया। उसने पीछे की डिग्गी में अपने साथी अजय परिहार को छुपा लिया था।
आरुष को स्कूल से लेने के बाद चालक कार बरुआसागर की तरफ ले गया। एकांत स्थान पर डिग्गी के पीछे से निकल कर आए अजय ने गाड़ी को ढकने के कवर से बच्चे को ढक दिया। इस दौरान जब डा. रूबी ने फोन किया तो अपहर्ता अजय ने फोन काट दिया। कुछ देर बाद फोन आया तो उसी ने काल रिसीव कर ड्राइवर व बच्चे के अपहरण की बात कहते हुए फिरौती की बात कही। इसके बाद राघवेंद्र कार को अपने पैतृक गांव करगुवां के पास घने जंगल में ले गया, जहां स्थानीय मददगारों के साथ फिरौती लेने की रणनीति बनाई। यहां से वह बरुआसागर की तरफ निकल गए। इस बीच पुलिस ने अपहरणकर्ताओं की घेराबंदी शुरू कर दी। पुलिस ने गांव तजपुरा थाना बरुआसागर के जंगल से दोनों अपहरण कर्ता गिरफ्तार कर लिए। उनकी निशानदेही पर पास से ही अपहृत बालक आरुष को मय कार बरामद कर लिया। एसएसपी ने बताया कि अब पुलिस टीमें कैरियर और फिरौती वसूलने की रणनीति में शामिल लोगों की तलाश में जुट गई है।
आईजी ने किया पुरस्कृत, डीजीपी से संस्तुति
अपहृत बालक की बरामदगी में एसएसपी के निर्देशन में एसपी सिटी राजेश कुमार, एसपी देहात दिनेश सिंह, सीओ मोंठ सोमेन वर्मा, सीओ सिटी कल्याण सिंह, सीओ सदर राघवेंद्र सिंह, सीओ टहरौली आलोक शर्मा, स्वाट टीम प्रभारी स्वतंत्र सिंह, इंस्पेक्टर नवाबाद, इंस्पेक्टर कोतवाली, इंस्पेक्टर मोंठ, इंस्पेक्टर सदर बाजार, थानाध्यक्ष मऊरानीपुर, समथर, उल्दन, सकरार, बरुआसागर की टीमों के अलावा दो दर्जन टीमें और लगाई गई थीं। सात घंटे में अपहृत की सकुशल बरामदगी होने पर आईजी कानपुर जोन ने पुलिस टीम को 15 हजार रुपये का इनाम व प्रशस्ति पत्र दिया है। उन्होंने डीजीपी को पुलिस टीमों को पुरस्कृत करने की संस्तुति भी की है।