मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर अंकुश लगाने की मंशा जताई है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डाक्टरों को चिह्नित कर सुबूतों के साथ रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इसके लिए वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई जाएगी।
सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस बड़ी समस्या बनी हुई है। इससे लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सही ढंग से नहीं मिल पा रहा है। शासन की सरकारी डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर अंकुश लगाने की तैयारी है। इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम निजी अस्पताल और क्लिनिकों की औचक जांच करेगी। यहां प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डाक्टरों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाएगी। चिकित्सकों के अस्पताल आने जाने के समय पर भी नजर रखी जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग अधिकारी सरकारी अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेंगे। सीएमओ डा.विनोद यादव ने बताया कि योजना बना ली गई है। सरकारी डाक्टरों की गोपनीय ढंग से जांच की जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
मेडिकल कालेज के बुरे हालात
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज के तमाम चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। मेडिकल के सामने ही निजी अस्पतालों में वह खुलेआम मरीजों को देखते हैं। यहां तक कि मेडिकल में कार्यरत कुछ डाक्टरों ने तो अपने निजी अस्पताल तक खोल रखे हैं। इनके आवासों पर भी मरीजों की भीड़ लगी रहती हैं।