रिमांड पेशी के लिए अब पुलिस को जेल से बंदियों को कोर्ट नहीं लाना होगा, बल्कि अब यह काम जेल से ही पूरा हो जाएगा। इसके लिए शनिवार से वीडियो कांफ्रेंसिंग व्यवस्था शुरू की गई है। पहले ही दिन सात पुरुष और एक महिला कैदी की रिमांड के लिए पेशी हुई।
न्यायालय परिसर व जिला कारागार में स्थित नवनिर्मित वीडियो कांफ्रेंसिंग कक्षों से शनिवार से इस नई व्यवस्था का शुभारंभ प्रशासनिक न्यायमूर्ति पंकज नकवी ने किया। इसके बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक ए के मिश्रा, जेलर कैलाश चंद्र की उपस्थिति में डिप्टी जेलर संदीप भास्कर ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एक-एक बंदी को रिमांड के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया।
पेशी के दौरान प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने बंदियों से जेल में उपलब्ध कराए जा रहे भोजन व अन्य सुविधाओं की जानकारी ली।
इस मौके पर जनपद न्यायाधीश अतुल कुमार गुप्ता, अपर जिला न्यायाधीश सुरेश चंद्र, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ओमवीर, जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ला, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अब्दुल हमीद, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विनोद कुमार यादव मौजूद रहे।
इस दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बताया कि इस सुविधा से अब जेल में बंद कैदियों की रिमांड कारागार में ही रहकर कराई जा सकेगी। संगीन अपराधों के बंदियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके अलावा अन्य जनपदों की जेलों में बंद कैदियों को भी कोर्ट लाने में होने वाली समस्याओं से बचा जा सकेगा।