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ऐसे तो नहीं घटेंगे अरहर की दाल के दाम

Thu, 22 Oct 2015 12:28 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। अरहर की दाल के दाम आसमान पर पहुंच चुके हैं। इससे आम जनमानस हलाकान है। बावजूद, दामों पर नियंत्रण के सरकार के दावे धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं। यहां तक कि जमाखोरी पर अंकुश लगाने को शासन द्वारा जारी किए गए निर्देश भी अब तक फाइलों से बाहर नहीं निकल पाए हैं।
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अरहर की दाल के भाव नित नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। इसकी कीमत दो सौ रुपये प्रति किलो पर जा पहुंची है। जमाखोरों के लिए अरहर सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बन गई है। जबकि, आम जनमानस की थाली से  सबसे पसंदीदा दाल गायब हो गई है। दाल की कीमतों पर नियंत्रण के लिए लोगों की निगाहें सरकार की ओर लगी हुई हैं। केंद्र व प्रदेश की सरकारों द्वारा इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाने के दावे भी किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर यह खोखले साबित हो रहे हैं। सरकारें अब तक दाल की कीमतों को नियंत्रित करने में असफल साबित हुई हैं।

 यहां तक कि जमाखोरी पर अंकुश लगाने को तैयार की गई योजना भी फाइलों में ही कैद होकर रह गई है। करीब एक सप्ताह पहले जमाखोरी रोकने के लिए प्रदेश के प्रमुख सचिव (खाद्य एवं रसद) ने मंडल व जिला स्तर पर टीमें गठित करने के निर्देश दिए थे। मंडल स्तर पर मंडलायुक्त व जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में टीमें बनाई जानीं थीं। इनमें विभिन्न विभागों के मंडल व जिला स्तरीय अधिकारियों को शामिल किया जाना था, परंतु निर्देशों के बाद भी यह टीमें नहीं बन पाई हैं, जिससे दाल की जमाखोरी जारी है और दाम नियंत्रण से बाहर बने हुए हैं।
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‘दाल के दामों पर नियंत्रण के लिए शासन ने निर्देश जारी किए हैं, जिनके अनुपालन में जल्द ही प्रभावी कार्यवाही की जाएगी।’ - डी के तिवारी, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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