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बेरोजगारों के लिए कम पड़ गई ‘स्वरोजगार की सब्सिडी’

Thu, 22 Oct 2015 12:23 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। बेरोजगारों की भीड़ के आगे सरकार की रोजगार सृजन की योजनाएं बौनी साबित हो रही हैं। इसका अंदाजा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा मंडल को आवंटित की गई सब्सिडी आवेदकों की संख्या के आगे कम पड़ गई है। मंडलायुक्त ने शासन से और सब्सिडी मांगी है।
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पीएमईजीपी के तहत बेरोजगारों को स्वरोजगार स्थापित करने को सरकार द्वारा बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। योजना के तहत शहरी क्षेत्र में इकाई स्थापित करने पर सामान्य वर्ग के पुरुषों को 15 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग की महिला व अन्य सभी को 25 प्रतिशत सब्सिडी सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। जबकि, ग्रामीण क्षेत्र में इकाई की स्थापना पर उक्त से दस फीसदी अधिक सब्सिडी दी जाती है। केंद्र सरकार द्वारा चालू वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए मंडल को 2.05 करोड़ रुपये की सब्सिडी उपलब्ध कराई गई है।

इनमें झांसी जनपद को 95 लाख, ललितपुर व जालौन को 55-55 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई है। लेकिन, ऋण के लिए आवेदन करने वाले बेरोजगारों की भीड़ के आगे यह सब्सिडी कम साबित हो रही है। मंडल में 1650 बेरोजगारों ने पीएमईजीपी के तहत ऋण मांगा है। इनमें सर्वाधिक संख्या झांसी जिले में 950, ललितपुर में 650 व जालौन में 250 है। उद्योग विभाग द्वारा इनमें से 728 बेरोजगारों की फाइल बैंकों को भेज दी गई है। झांसी के 373, ललितपुर के 250 व जालौन के 105 बेरोजगारों की फाइल बैंकों को प्रेषित की गई हैं। लेकिन, प्राप्त सब्सिडी के सापेक्ष उक्त संख्या में बेरोजगारों को ऋण मिलना मुश्किल जान पड़ रहा है, जिसके चलते मंडलायुक्त के राम मोहन राव ने प्रमुख सचिव (उद्योग) को पत्र लिखकर और सब्सिडी की मांग की गई है।
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25 लाख तक का मिलता है ऋण
झांसी। पीएमईजीपी के तहत सेवा क्षेत्र की इकाई के लिए दस लाख तथा उद्योग के लिए 25 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसमें सामान्य वर्ग के पुरुष आवेदक को अपना अंशदान 10 प्रतिशत करना होगा है। जबकि, सामान्य महिला समेत अन्य सभी वर्गों के लोगों को महज पांच फीसदी ही अंशदान करना पड़ता है। सब्सिडी राशि बैंक द्वारा ऋण की पहली किस्त जारी किए जाने पर ऋणधारक के ऋण खाते में सरकार द्वारा भेज दी जाती है।


मंडल में बेरोजगारी की समस्या को दृष्टिगत रखते हुए यहां ज्यादा से ज्यादा स्वरोजगार सृजन की आवश्यकता है। यही वजह है कि मंडलायुक्त द्वारा शासन से और सब्सिडी राशि मांगी गई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को ऋण उपलब्ध कराया जा सके।
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- रविकांत शुक्ला, डिप्टी कमिश्नर उद्योग
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