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पॉलीथिन दिख रही है, मगर चुपके-चुपके

Sun, 24 Jan 2016 01:15 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। श्री रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखित ‘भय बिनु प्रीत न होय गुसाई’ पॉलीथिन अभियान पर चरितार्थ हो रही है। पॉलीथिन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध ना शहरी क्षेत्र में और ना ही गांवों में दिख रहा है। जगह-जगह चुपके-चुपके पॉलीथिन का उपयोग हो रहा है।
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21 जनवरी से पूरे प्रदेश में शासन ने पॉलीथिन उत्पादन, आयात, भंडारण व क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रतिबंध का पालन न करने पर पांच साल कैद या एक लाख रुपये जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान कर दिया है। कड़ी कार्रवाई के प्रावधान के डर से व्यापारियों ने पॉलीथिन रखना बंद कर दिया है। शहरी क्षेत्र में कुछेक दुकानदार चोरी छिपे पॉलीथिन का उपयोग कर रहे हैं।

कार्रवाई के नाम पर हुई औपचारिकता के कारण पॉलीथिन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध नहीं लग सका है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी कार्रवाई के लिए अपनी रणनीति तैयार नहीं की है।
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बोर्ड के अफसरों का कहना है कि वह आने वाले दिनों में टीम में शामिल सभी विभागों के साथ बैठक करके रणनीति तैयार करेंगे, लेकिन सवाल यह है कि एक माह पहले जारी हुई अधिसूचना के बाद रणनीति तैयार क्यों नहीं हुई। यदि तब रणनीति तैयार कर ली जाती तो पॉलीथिन पर प्रतिबंध का पालन कड़ाई से शुरू हो जाता।

प्रतिबंधित प्लास्टिक जलाने की चर्चाएं
शनिवार को नगर निगम के कुछ अधिकारियों की टीम पॉलीथिन पर प्रतिबंध की जांच करने के लिए निकली। बताया गया कि इलाइट चौराहे पर स्थित एक होटल से टीम ने प्लास्टिक के कप बरामद किए। टीम ने उन्हें जब्त कर अपनी गाड़ी में रख लिया।

टीम में शामिल कुछ कर्मचारी जब्त किए गए प्लास्टिक के कपों को अपने साथ ले जाने की जुगाड़ करने लगे। यह सब देख टीम का नेतृत्व कर रहे अफसर भड़क गए और उन्होंने  जब्त की गई प्लास्टिक को आग के हवाले कर दिया। इसी दौरान किसी ने उनके कान में कहा कि प्लास्टिक को जलाना पर्यावरण के नियमों के विरुद्ध है तो आनन-फानन में उन्होंने सफाई कर्मियों को बुलाकर सफाई करा दी।

दुकानों पर दिखने लगे थैले
पॉलीथिन पर लागू प्रतिबंध के बाद दुकानदारों ने उसका विकल्प तलाश लिया है। दुकानदारों ने कपड़े के थैले मंगाकर रख लिए हैं। दुकानों पर तीन अलग-अलग साइजों में थैले उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत ग्राहकों से ही ली जा रही है। छोटे साइज का थैला दो रुपये में, मध्यम साइज का पांच रुपये में और बड़े साइज का थैला दस रुपये में दिया जा रहा है। अभी यह व्यवस्था बड़े व्यापारियों की दुकानों में है।
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