अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पुलिस विभाग में यात्रा भत्ता एवं चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिल पिछले नौ माह से अटके हुए थे जबकि खाते में तीन करोड़ रुपये पड़े हैं। इसी लापरवाही पर अकाउंटेंट प्रमोद कुमार पाल का निलंबन हुआ। अकाउंटेंट की इस लापरवाही से पुलिसकर्मियों के भुगतान संबंधी करीब सात हजार नक्शे फाइलों में दब गए। अकाउंटेंट के निलंबन के बाद शुक्रवार को आंकिक शाखा में पुराने नक्शों की फाइलों को बाहर निकाला गया। अब जाकर इनके भुगतान की प्रक्रिया आरंभ हुई है।
पुलिसकर्मियों को विवेचना अथवा दबिश में गैर जनपद जाना पड़ता है। इसके एवज में उनको यात्रा भत्ता दिया जाता है। गैर जनपद में आठ घंटे से अधिक ठहरने पर दैनिक भत्ता मिलता है। दबिश से लौटने के बाद पुलिस टीम नक्शा लगाती है। इसके जरिये उनको यात्रा भत्ता मिलता है। सूत्रों ने बताया कि मई से यात्रा भत्ता दिया जाना बंद हो गया जबकि हर महीने विवेचक एवं पुलिस टीम गैर जनपद जाती रही।
नियमित भुगतान न होने से नक्शे लंबित होते गए। पिछले नौ महीने के दौरान सात हजार से अधिक नक्शे लंबित रहे। मेडिकल बिल का भी भुगतान नहीं हो रहा है। मामला आईजी आकाश कुलहरि तक जा पहुंचा। सालाना निरीक्षण के दौरान एसएसपी ऑफिस के आंकिक शाखा पहुंचे आईजी ने खुद लंबित फाइलों का अंबार देखा। आईजी ने भी अकाउंटेंट से जवाब तलब किया लेकिन वह कोई जवाब नहीं दे सका। उनको आईजी ने तत्काल निलंबित कर दिया। अकाउंटेंट के निलंबन से शुक्रवार को आंकिक शाखा में खासी हलचल रही। नौ माह से लंबित नक्शे निकाले गए।