अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। हाईटेक हो रही संचार सुविधाओं के मुकाबले जेल प्रशासन 2जी तकनीक आधारित जैमर के भरोसे है। मोबाइल फोन जहां 5जी नेटवर्क पर चल रहे हैं। वहीं, झांसी जेल में 2-जी तकनीक आधारित जैमर ही काम कर रहा है।
खास बात यह कि इससे डाटा ट्रांसफर नहीं रोका जा सकता। इस वजह से जेल से धड़ल्ले से व्हाट्सएप कॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुराने जैमर इसे रोकने में फेल साबित हो रहे हैं। मोटा बजट खर्च होने की वजह से जैमर अपडेट नहीं हो पा रहा है।14 दिसंबर को जेलर कस्तूरीलाल गुप्ता पर प्राणघातक हमले की साजिश के सुराग जेल के अंदर भी मिले हैं। जांच में यह बात सामने आई कि जेलर के बाहर जाने की मुखबिरी जेल से हुई। मोबाइल फोन इसमें सहारा बना।
जेल सूत्रों का दावा है कि जेल में हिस्ट्रीशीटर कमलेश यादव, अजय जडेजा गिरोह के पास मोबाइल फोन था। तलाशी के दौरान यह बरामद भी हुआ लेकिन अफसर चुप्पी साध गए। जेल अफसरों का कहना है जेल परिसर के अंदर से मोबाइल अथवा कोई भी इलेक्ट्रानिक वस्तु आज तक बरामद नहीं हो सकी है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक विनोद कुमार के मुताबिक, जेल के भीतर आने-जाने वालों की कड़ाई से तलाशी कराई जाती है। शासन स्तर से ही जैमर अपडेट किए जा सकते हैं। हमले मामले की जांच हो रही है।