झांसी/चिरगांव। शराब कारोबारी शौकीनों की जेब पर जमकर निशाना साध रहे हैं। महंगे ब्रांड की शराब की बोतलों में सस्ती शराब भरकर बेची जा रही है। यह खुलासा बुधवार को हुई जांच में हुआ। चिरगांव में शराब की दुकान पर नकली शराब की18 पेटियां बरामद हुई हैं। इसके अलावा शहर की दो दुकानों में भी नकली शराब की बिक्री होने का संदेह होने पर नमूने भरे गए।
महंगे ब्रांड की शराब की बोतलों में जमकर मिलावट हो रही है। मध्य प्रदेश, हरियाणा व अन्य राज्यों की सस्ती अंग्रेजी शराब की बोतलें यहां व्यापक पैमाने पर तस्करी कर लाई जा रही हैं, जिन्हें यहां प्रचलित महंगे ब्रांड की बोतलों में रिफिल कर दिया जाता है। यह खेल पिछले लंबे समय से जारी है। इससे शराब कंपनियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रचलित ब्रांड मैकडॉवल्स कंपनी के प्रतिनिधियों ने इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को दी। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अनुराग यादव ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) उमेश नारायण पांडेय, नगर मजिस्ट्रेट आर पी मिश्रा व उप जिलाधिकारी (सदर) भगवान शरण के नेतृत्व में तीन टीमें गठित कीं, जिसमें पुलिस व आबकारी विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया।
नगर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में गठित टीम ने चिरगांव में दुकानों की जांच की। यहां जितेंद्र राय की शराब की दुकान के ऊपर गोदाम में बड़ा गोरखधंधा पकड़ा गया। दुकान के ऊपरी भाग में बने कमरे में अधिकारियों ने 18 शराब की पेटियां पकड़ीं, जिन्हें चिरगांव पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने दुकान के सेल्समैन को हिरासत में ले लिया। गोदाम में मध्य प्रदेश की सस्ती अंग्रेजी शराब को रायल स्टिक, मैकडॉवल्स, इंपीरियर ब्ल्यू आदि महंगे ब्रांडों की बोतलों में भरा जा रहा था। यहां रैपर, होलोग्राम आदि सामग्री भी मिली।
वहीं, अपर जिलाधिकारी के नेतृत्व में जिला आबकारी अधिकारी प्रेमनारायण की टीम ने शहर में शराब की दुकानों की जांच की। यहां सीपरी बाजार, चित्रा चौराहा, बीकेडी, बेतवा क्लब के पास व जेल चौराहा मॉडल शॉप की जांच की गई। नकली शराब का संदेह होने पर सीपरी बाजार व चित्रा चौराहा की दुकान से शराब के नमूने भरे गए। संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।
ओवररेटिंग भी जारी
झांसी। शराब के शौकीनों पर दोहरी मार पड़ रही है। उन्हें मिलावट के साथ - साथ ओवररेटिंग का भी सामना करना पड़ रहा है। बीयर के केन /बोतल पर धड़ल्ले से पंद्रह से बीस रुपये तक की ओवरेटिंग की जा रही है। इसके अलावा शराब की बोतलों पर बीस से पच्चीस रुपये की ओवररेटिंग आम बात है। जबकि, महंगे ब्रांड पर निर्धारित से पचास रुपये तक अधिक वसूल कर लिए जाते हैं। इसे लेकर आए दिन उपभोक्ताओं व विक्रेताओं के मध्य विवाद की स्थिति बन जाती है। बावजूद, इस पर अंकुश को कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।