पुलिस की लापरवाही से देर से हुआ पोस्टमार्टम
मुठभेड़ की घटना के बाद खून से लथपथ हालत में पुष्पेंद्र को पुलिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसराय लेकर पहुंची थी। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद आनन-फानन में पुलिस बिना पंचनामा भरे मऊरानीपुर स्थित पोस्टमार्टम हाउस लेकर पहुंची थी, जहां पंचनामा न भरे होने के कारण चिकित्सकों ने पोस्टमार्र्टम करने से हाथ खड़े कर दिए थे। इसके बाद सुबह करीब 11 बजे सुबह पुन: मऊरानीपुर से शव को वापस गुरसराय लेकर पहुंची थी। यहां उपजिलाधिकारी गरौठा धीरेंद्र प्रताप सिंह व तहसीलदार मनोज कुमार की उपस्थिति में सदर एसआई सत्यदेव पाठक समेत अन्य पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में पंचनामा भरने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया था। पुलिस को पहले ही कागजी कार्र्रवाई कर मेडिकल कॉलेज लाना था, लेकिर कभी मऊरानीपुर तो कभी गुरसराय शव लेकर पुलिस चक्कर लगाती रही, जिसे लेकर तरह-तरह के कयास भी लगते रहे।
क्षेत्र में था खासा दबदबा
मृतक पुष्पेंद्र यादव का क्षेत्र में खासा दबदबा था। जिसकेे चलते वह वह लंबे समय से बालू का काम कर रहा था। उसके पास गाड़ियां भी थीं। पुष्पेंद्र के पिता हरीशचंद्र सीआईएसफ में कार्यरत थे। करीब 10 साल पहले उसके पिताजी की कुएं में गिरने से आंखों की रोशनी चली गई थी। जिसके बाद उनकी नौकरी पुष्पेंद्र के बड़े भाई रवींद्र को नौकरी मिल गई थी। रविंद्र वर्तमान में दिल्ली मेट्रो में सीआईएसएफ की नौकरी कर रहे हैं। जबकि, पुष्पेंद्र का चचेरा भाई पुलिस विभाग में ही दरोगा है।
खुफिया एजेंसियां की रही नजर
पुलिस मुठभेड़ में मारे गए पुष्पेंद्र के मामले में अधिकारियों से लेकर खुफिया एजेंसियां चौैकन्नी रही। लखनऊ से भी अफसर अपडेट लेते रहे। ऐसे में पोस्टमार्टम हाउस के पास हर मामले की जानकारी खुफिया एजेसियां जुटाती रहीं। पल-पल की जानकारी अपडेट कर अधिकारियों तक पहुंचाई गई। देर शाम खुफिया एजेसियां भी पूरी तरह सक्रिय नजर आईं।
जिम्मेदारियां थीं तय
पुलिस ने पोस्टमार्टम कराए जाने से लेकर शव को करगुवां खुर्द पहुंचाने व अंतिम संस्कार कराने के लिए पुलिस की जिम्मेदारियां तय कर दी थीं। गुरसराय से लेकर पोस्टमार्टम पहुंचाने के लिए लहचूरा व सकरार पुलिस के साथ शव के साथ गांव तक लाने के लिए बबीना, बड़ागांव, सदर, चिरगांव व सकरार पुलिस को लगाया था। वहीं, गांव में शव के अंतिम संस्कार कराने के लिए सीओ मऊरानीपुर, सीओ टहरौली के साथ एरच, टोड़ीफतेहपुर, पूंछ, शाहजहांपुर, बरुआसागर, गरौठा व उल्दन पुलिस की जिम्मेदारी तय की गई थी।
पूरे दिन लीपापोती में जुटी रही पुलिस
इस घटना के बाद रविवार सुबह से ही गुरसराय थाना क्षेत्र में पुलिस बल का डेरा रहा। अधिकारियों समेत कई थानों का फोर्स गुरसराय में जमा रहा। बताया गया है कि पुलिस अपने कागजों में युवक को अज्ञात दर्शाती रही थी। यहां तक कि मुठभेड़ के दौरान गोली लगने के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसराय लाने के दौरान भी युवक को अज्ञात ही दर्शाया गया। डॉक्टर ने युवक की मौत की पुष्टि के बाद पुलिस द्वारा बिना पंचनामा भर ही तड़के सुबह ही युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए मऊरानीपुर रवाना कर दिया, लेकिन पंचनामा ना होने के कारण पोस्टमार्टम हाउस से शव को वापस भेज दिया गया। जिसके बाद शव को वापस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसराय लाया गया इसके बाद पुलिस द्वारा एक बार फिर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा पोस्टमार्टम के लिए भेज देने की करीब एक घंटे बाद पुलिस ने पंचनामा भरने के लिए आसपास के लोगों को पकड़ कर पंचनामा फार्म पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा। बताया गया है कि थाने पर आए एक व्यक्ति से पंचनामा भरवा दिया गया था। इस मामले में घटना के पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी भी पत्रकारों के सवालों के जवाब देने से बचते रहे। वहीं परिजनों ने बताया कि उनके पुत्र पुष्पेंद्र पर कोई आपराधिक इतिहास नहीं था।
तीन माह पहले ही हुई थी शादी
मुठभेड़ में मारे गए पुष्पेंद्र की शादी तीन माह पहले ही जालौन जनपद के पिपराया की रहने वाली शिवांगी से हुई थी। घटना की सूचना मिलने के बाद से ही पुष्पेंद्र यादव की पत्नी शिवांगी व परिजनों का बुरा हाल है। इस घटना के बाद पुलिस की गोली लगने से हुई पुष्पेंद्र की मौत से एक तरफ जहां पूरे गांव में मातम छाया हुआ है।