फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jhansi News: साइबर अपराधियों से निपटने में पुलिस के पास नहीं हाइटेक तकनीक

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

झांसी। साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। थानों में साइबर सेल भी खोले गए। इसके बावजूद पुलिस साइबर जालसाजों से निपट पाने में नाकाम साबित हो रही है। उसके पास अभी भी अत्याधुनिक तकनीकी का अभाव है। इस वजह से देशभर में फैले साइबर अपराधियों के सामने पुलिस कमजोर पड़ रही है। अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर और विशेषज्ञ न होने से पुलिस महज दस फीसदी मामलों में बैंक खाते ही फ्रीज करा सकी जबकि झांसी में रोजाना औसतन 10-15 लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं।
विज्ञापन



साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अधिकांश मामलों में शातिर जालसाजों को पुलिस ट्रेस भी नहीं कर पाती। इससे वारदात के बाद भी वह पुलिस के चंगुल में नहीं आ पाते। थानों में प्रशिक्षित कर्मियों के अभाव के साथ आधुनिक संसाधन भी नहीं हैं। इस वजह से जीमेल, गूगल, मेटा जैसी कंपनियों से डेटा लेने में उसे तीन से चार माह लग जाता है। तब तक जालसाज दूसरी पहचान के साथ अपराध करने लगता है। ऐसे में पुलिस उन तक पहुंच नहीं पाती। हाल में कुछ घटनाओं में पुलिस को शातिर जालसाजों का सुराग लगा लेकिन उसके पहुंचने से पहले बदमाशों ने अपने ठिकाने बदल दिए। एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति का कहना है कि पुलिस बल को लगातार आधुनिक किया जा रहा है। साइबर जालसाजों को पकड़ा भी जा रहा है।
विज्ञापन


इनसेट
यह आ रही हैं दिक्कतें
- अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर एवं विशेषज्ञ न होने से साइबर जालसाजों का सुराग नहीं लग पाता
- जीमेल, गूगल, मेटा, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्म से डेटा का आसानी से न मिलना
- साइबर जालसाजों के बाहरी राज्यों में होने से धरपकड़ करने में दिक्कतें
- ठगी की शिकायत सामने आने के बाद बैंकों से तुरंत नहीं हो पाता तालमेल

इनसेट
इन संसाधनों की है जरूरत

आधुनिक डाटा रिकवरी सॉफ्टवेयर
हाईटेक कंप्यूटर

अत्याधुनिक संचार माध्यम
आधुनिक तकनीकी से प्रशिक्षित कर्मचारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें