डायरी में मुकदमे और उससे जुड़ी कार्रवाई को दर्ज करती पुलिस का चेहरा अब बदलने वाला है। जिले की पुलिस अब जल्द ही डायरी नहीं, बल्कि हाथ में टैबलेट के साथ नजर आएगी। शुरूआती चरण में पचास दारोगाओं को टैबलेट मिलेंगे। इसका प्रस्ताव बनाकर शासन स्तर पर भेजा गया है। सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) के तहत पुलिस मुकदमों और उनसे जुड़ी कार्रवाई को ऑनलाइन कर रही है। इसके लिए विवेचकों के काम को सरल बनाने और गलती की कोई गुंजाइश न हो, इसके लिए पुलिस को टैबलेट मुहैया कराने पर विचार कर रही है।
मौजूदा व्यवस्था में विवेचक घटनास्थल पर पहुंचकर पूरी विवेचना डायरी में नोट करता है और फिर उसे कंम्प्यूटर में फीड किया जाता है। इस लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए भी पुलिस को हाईटेक करने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके तहत अब जिले में जल्द ही विवेचना टैबलेट से होगी। शुरूआती दौर में पचास दारोगाओं को टैबलेट देने की तैयारी है। टैबलेट से विवेचना में दारोगा किसी भी तरह की मनमानी नहीं कर सकेंगे। विवेचना ऑनलाइन होने से लोगों की भी कई समस्याएं दूर होेेंगी। क्योंकि, किसी भी तरह का बहाना बनाकर पुलिसकर्मी विवेचना में देरी नहीं कर सकेंगे। किसी वारदात के मामले में विवेचक ने मौके पर जाकर क्या साक्ष्य जुटाए, किन लोगों के बयान दर्ज किए। कितने पर्चे काटे गए और कब अंतिम पत्र या आरोप पत्र जारी किया। इस प्रक्रिया को टैबलेट में दर्ज करने के साथ ऑनलाइन हो जाने के बाद अफसर नजर रख सकेंगे।
पढ़ने में होगी आसानी
सीसीटीएनएस के तहत विवेचनाओं पर अफसरों की सीधी नजर रहेगी। इसके साथ ही नई व्यवस्था से विवेचक को रजिस्टर के रखरखाव और उसकी सुरक्षा करने की जिम्मेदारी से भी निजात मिलेगी। विवेचना को पढ़ने में भी अन्य अफसरों को आसानी रहेगी। जबकि, रजिस्टर में कई बार साफ लेखन के अभाव में शब्दों को पढ़ना कई बार मुश्किल होता था।
निपटारा और अपील के नतीजे ऑनलाइन होंगे
विवेचना की प्रक्रिया पूरी तरह से लागू होने के बाद अदालत द्वारा संबंधित मामलों का निपटारा करने और अपील के नतीजे भी कंप्यूटर में फीड किए जाएंगे। इसमें करीब तीन माह का समय और लगेगा।
मिलेगा फायदा
टैबलेट से विवेचना होने के कई फायदे होंगे। पुलिस के साथ जनता को भी राहत मिलेगी। साथ ही विवेचना मेें पूरी तरह पारदर्शिता भी बनी रहेगी।
कुलदीप नारायण, पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण)