झांसी। सियासी संबंधों का लाभ लेकर करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने वाले माफिया आज इतने ताकतवर हो गए हैं कि पुलिस और प्रशासन से भी टकराने से नहीं चूकते। झांसी में पिछले दो साल के भीतर पुलिस और प्रशासनिक टीमों पर दस से ज्यादा हमले हो चुके हैं। कभी प्रशासनिक टीम पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की गई तो कभी कार। इतना ही नहीं पुलिस पर असलहे तक ताने गए हैं। खनन माफियाओं के गुर्गों ने पथराव तक किया है। झांसी में ही 22 खनन माफिया हैं जिनका बड़ा नेटवर्क है। कइयों का सियासी पार्टियों से भी गहरा ताल्लुक रहा है।
अगर झांसी की बात करें तो यहां खनन का बड़ा काम है। हालांकि प्रशासन स्तर से खनन के लिए पट्टे भी किए जाते हैं लेकिन माफिया फिर भी अवैध रूप से धड़ल्ले के साथ खनन करते हैं। सरकार कोई भी हो लेकिन यह माफिया उसी में खुद को किसी न किसी तरह से फिट कर ही लेते हैं। यही वजह है कि इन लोगों के खिलाफ जब भी पुलिस या प्रशासनिक कार्रवाई होती है तब वह किसी न किसी वजह से रोक दी जाती है। इस तरह के कई बड़े मामले झांसी में सामने आ चुके हैं।
-17 जून 2018 को गरौठा में एसडीएम और तहसीलदार की गाड़ी पर खनन माफिया ने हमला कर दिया था
-28 अप्रैल 2018 को चिरगांव पुलिस पर खनन माफिया ने हमला कर दिया था
-6 अक्तूबर 2019 को मोंठ में पुलिस पर खनन माफिया ने पिस्टल तान दी थी
-17 नवंबर 2019 को पुलिस पर हमला खनन माफिया के गुर्गों ने हमला कर दिया था
6 मार्च 2020 को एसडीएम पर खनन माफिया ने गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की थी
25 नवंबर 2020 को मऊरानीपुर में खनन माफिया ने पुलिस पर पथराव कर दिया था
दबिश देने गई पुलिस को जब बीच में ही रोक दिया गया था
झांसी। माफियाओं पर कार्रवाई के लिए जब जब मुहिम शुरू होती है तब ही कुछ न कुछ बाधाएं आने लगती हैं। एक बार पुलिस ने एक माफिया के खिलाफ अभियान शुरू किया था और एक पुलिस अधिकारी दबिश देने के लिए निकला तो उसे बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा था। कुछ के ट्रांसफर तक हो गए थे। झांसी में दो बड़े अफसरों के तबादले भी माफियाओं के दबाव के चलते कर दिए गए थे। उस दौरान इसे लेकर काफी हल्ला भी मचा मगर कुछ दिनों के बाद सब खामोश कर दिया गया था।