अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुधवार को विधानसभा घेराव में शामिल होने के लिए लखनऊ जाने से पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन समेत 19 वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने उनके घरों में नजरबंद करके बाहर पुलिस फोर्स तैनात कर दिया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं की पुलिस से जमकर नोंकझोंक हुई। कांग्रेस नेताओं ने जमकर नारेबाजी भी की। देर-रात तक पुलिस फोर्स नेताओं के घरों के बाहर ही तैनात रही। वहीं, नजरबंद नेता लखनऊ जाकर प्रदर्शन की बात पर अड़े हुए हैं। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया है।
मंगलवार शाम मानिक चौक स्थित कार्यालय पर पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता 18 दिसंबर को लखनऊ में आयोजित प्रदर्शन की रणनीति तय कर रहे थे। उसी समय सीओ सिटी रामवीर सिंह कोतवाली, नवाबाद एवं सीपरी बाजार थाने के पुलिस बल समेत वहां जा पहुंचे। भारी पुलिस बल को देख वहां हंगामा शुरू हो गया। कार्यकर्ता नारेबाजी करने लगे। पुलिस अफसरों ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर किसी तरह उनको शांत कराया। इसके बाद सभी को लेकर कोतवाली पहुंचे। इसके बाद सभी को घरों में भेजकर नजरबंद कर दिया गया। नजरबंद होने वाले पूर्व मंत्री प्रदीप जैन समेत निवर्तमान जिलाध्यक्ष योगेंद्र पारीछा, प्रदेश सचिव मनीराम कुशवाहा, राहुल रिछारिया, अरविंद बबूल, शेखर नलवंशी, इंद्रजीत बादशाह, संदीप नाहर, राहुल चौहान, इमरान खान समेत 19 अन्य नेता शामिल हैं। एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह के मुताबिक कानून व्यवस्था को देखते हुए यह कार्रवाई की गई।
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सरकार का तानशाह रवैया उजागर: प्रदीप
कांग्रेस नेताओं को लखनऊ न जाने देने पर पूर्व मंत्री प्रदीप जैन ने इसे सरकार का तानशाह रवैया बताया। कहा, प्रदेश में पुलिसिया लोकतंत्र स्थापित करने की कोशिश हो रही है। जनता इसे याद रखेगी। आने वाले समय में जनता इसका हिसाब लेगी। लखनऊ जाकर वह लोग जनता की आवाज पहुंचाएंगे। सरकार के इस फैसले की निंदा की।
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बस बड्डों समेत रेलवे स्टेशन पर भी पुलिस की निगाह
कांग्रेस कार्यकर्ता चकमा देकर कहीं बस अथवा रेलवे स्टेशन से न निकलने पाएं, इसके लिए पुलिस बल बस अड्डों समेत रेलवे स्टेशन पर भी तैनात रहा। कार्यकर्ताओं के घरों के आसपास भी पुलिस सिपाहियों को तैनात कर दिया गया।