झांसी। जिले में गैस एजेंसियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी उज्जवला योजना में घालमेल कर दिया। जिले में बडे़ पैमाने पर एजेंसियों ने अपात्रों को गैस कनेक्शन बांट दिए। साथ ही गैस कनेक्शन देने के नाम पर वसूली की गई। आलम यह रहा कि एजेंसियों ने योजना में अपने लाइसेंस क्षेत्र के बाहर लाभार्थियों को कनेक्शन बांट दिए। मामले में शिकायत के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने संज्ञान लिया है। इसके बाद केंद्र सरकार की विजिलेंस टीम ने झांसी में डेरा डाल दिया है। टीम एजेंसियों से डाटा लेकर लाभार्थियों का सत्यापन करने में जुट गई।
दरअसल, साल 2018 में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उज्जवला योजना में जिले में 57 हजार लाभार्थियों को गैस कनेक्शन दिए गए थे। कनेक्शन देने के नाम पर एजेंसियों ने पात्रों से तीन-तीन हजार रुपये वसूल किए। इसके साथ ही परवई स्थित गैस एजेंसी ने अपने लाइसेंस क्षेत्र से बाहर राजगढ़ क्षेत्र में कनेक्शन बांट दिए। शिकायत पर जिला स्तरीय अधिकारियों ने मामले की जांच की, तो सामने आया कि योजना का लाभ गरीबों और अमीरों को दे दिया गया।
दो साल पहले अधिकारियों ने राजगढ़ से 554 गैस सिलिंडर, उज्जवला योजना की किताबें और शपथ पत्र जब्त किए थे। मामले में 10 गैस एजेंसियों को नोटिस दिए गए, लेकिन महज चार गैस एजेंसियों ने जवाब दिया। इसके बाद प्रशासन ने मामले की जानकारी पेट्रोलियम मंत्रालय को दी। अब मंत्रालय की संस्तुति पर केंद्र सरकार की दो सदस्यीय विजिलेंस टीम ने जिले में डेरा डाल दिया है। टीम गैस एजेंसियों पर पहुंचकर पीएम उज्जवला योजना का डाटा तलब कर रही है। जिले के करारी, बिरगुवां, बिजौली, परवई, राजगढ़ समेत कई जगह संचालित गैस एजेंसियों पर टीम ने जांच की है। साथ ही घर-घर जाकर लाभार्थियों का सत्यापन कर रही है। वहीं विजिलेंस की जांच गोपनीय होने के चलते अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। उधर, गैस एजेंसी संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
कई लाभार्थियों के खातों में नहीं पहुंची सब्सिडी
योजना के तहत लाभ पाने वाले तमाम लाभार्थियों के खाते में आज तक गैस सब्सिडी नहीं पहुंची है। इसे लेकर तमाम पात्र भटक रहे हैं। योजना का लाभ देने के नाम पर एजेंसियों ने पात्रों से वसूली की थी। पात्रों से कहा गया कि उनसे ली गई राशि सब्सिडी के तौर पर वापस पहुंच जाएगी, लेकिन आज तक तमाम पात्रों को सब्सिडी नहीं मिली।