प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से सीधा और आत्मीय संवाद स्थापित किया। झांसी की वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम ‘मणिकर्णिका’ और उनकी जन्मस्थली वाराणसी को एकसूत्र में पिरोते हुए कहा कि उन्हें बुंदेलखंड से ‘मणिकर्णिका’ की जन्मभूमि जोड़ती है।
प्रधानमंत्री का कौशल है कि वह किसी भी जनसभा में सीधे जनता से जुड़कर संवाद स्थापित करते हैं। यही खूबी उन्होंने भोजला मंडी में हुई जनसभा में भाषण के दौरान दिखाई। अपने संबोधन में मोदी ने झांसी की रानी के बचपन के नाम ‘मणिकर्णिका’ से खुद को जोड़ा।
उन्होंने कहा कि ‘मणिकर्णिका’ ने देश की आजादी के आंदोलन को नई रोशनी दी थी। वह काशी की बेटी थीं। वाराणसी ने मुझे अपना सांसद बनाया है। ‘मणिकर्णिका’ की जन्मभूमि व मेरी कर्मभूमि एक ही है।
बोले कि रानी लक्ष्मीबाई के झांसी से जुड़े होने के कारण मेरा भी बुंदेलखंड से लगाव है। उनके भाषण की खास बात यह रही कि उन्होंने वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई को उनके बचपन के नाम ‘मणिकर्णिका’ से ही संबोधित किया।
उन्होंने खुद को वायदा निभाने वाला बताया और कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले जब वह झांसी आए थे, तब उन्होंने जो वादा किया था कि उसे ब्याज समेत लौटा दिया है। उन्होंने बीस अरब रुपये की विकास योजनाओं की आधारशिला रखी और कहा कि अपना वायदा पूरा कर दिया है।