झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में कुछ समय में प्लाज्मा बैंक की स्थापना हो सकती है। कॉलेज प्रशासन ने आईसीएमआर को पत्र लिखकर अनुमति मांगी है। जब तक बैंक की अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन सरकारी खर्च पर मरीजों को लखनऊ ले जाकर प्लाज्मा डोनेट करवाएगा। ताकि, कोरोना वायरस के गंभीर मरीजों की प्लाज्मा थेरेपी से जान बचाई जा सके।
कोरोना वायरस के दौर में कोविड के गंभीर मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी के जरिए ठीक किया जा चुका है। सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद शासन का भी प्लाज्मा थेरेपी पर जोर है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने प्लाज्मा बैंक की अनुमति के लिए आईसीएमआर को पत्र लिखा है। अनुमति मिलने में थोड़ा समय लग सकता है। प्लाज्मा निकालने के लिए एफेरेसिस मशीन भी खरीदनी पड़ेगी। ऐसे में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तय किया है कि बैंक की स्थापना होने तक झांसी में कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों को सरकारी खर्च पर लखनऊ ले जाया जाएगा। वहां केजीएमयू या एसजीपीजीआई में मरीजों से प्लाज्मा डोनेट कराया जाएगा। फिर जरूरत पड़ने पर कोविड मरीज की प्लाज्मा थेरेपी की जाएगी।
क्या होता है प्लाज्मा
प्लाज्मा रक्त में उपलब्ध एक तरल पदार्थ होता है। इसका 92 फीसदी भाग पानी होता है। प्लाज्मा में पानी के अलावा प्रोटीन, ग्लूकोस मिनरल, हार्मोंस, कार्बन डाइऑक्साइड होते हैं। शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन रक्त के प्लाज्मा द्वारा होता है। इसके अलावा रक्त में सिरम एल्बुमिन, कई तरह के प्रोटीन और इलेक्टोलाइट्स भी पाए जाते हैं। वहीं, रक्त कोशिकाओं में पाए जाने वाले हीमोग्लोबिन और अयरन तत्व की वजह से खून लाल होता है। दिल शरीर में रक्त का संचार करता है। कोरोना के अटैक के बाद शरीर वायरस से लड़ना शुरू करता है। यह लड़ाई एंटीबॉडी लड़ती है, जो प्लाज्मा की मदद से ही बनती है। अगर शरीर पर्याप्त एंटीबॉडी बना लेता है तो कोरोना हार जाता है।
क्या है प्लाज्मा थेरेपी
जब किसी मनुष्य में कोरोना का इंफेक्शन होता है, तो उसका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए खून में एंटीबॉडी बनाता है। यह एंटीबॉडी इंफेक्शन को खत्म करने में मदद करती है और ज्यादातर मामलों में जब पर्याप्त एंटीबॉडी बन जाती है तो वायरस नष्ट हो जाता है। ऐसा व्यक्ति प्लाज्मा दान कर सकता है। उसके खून से प्लाज्मा निकाला जाता है और उसमें मौजूद एंटीबॉडी को जब किसी दूसरी मरीज में डालते हैं तो वह ठीक होने में मदद करती हैं। बताया गया कि एक इंसान के खून से दो लोगों का इलाज किया जा सकता है।
प्लाज्मा थेरेपी शुरू के लिए आईसीएमआर से अनुमति मांगी गई है। जब तक अनुमति नहीं मिलती, तब तक झांसी में ठीक हो चुके मरीजों को सरकारी खर्च पर केजीएमयू या एसजीपीजीआई ले जाकर प्लाज्मा डोनेट कराएंगे। कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों से अपील है कि वह दूसरों की जान बचाने के लिए प्लाज्मा डोनेट करें। यह पुण्य का काम है। - डॉ. एनएस सेंगर, उप प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।